[1] बाकि तूँ अइसन बात कहल करऽ जे खरा उपदेस के लाय क हइ।
[2] बूढ़ आमदी चेतल, गहिर आउर संज मी होय, आउर उनकर बिसवास, परेम आउर धीरज प क्का हो।
[3] ईहे तरह बूढ़ आउरतिय न के चाल-चलन पवित्तर लोग नियन हो ऊ दोष लगावे वाली आउर पि य क्कड़ नञ, बाकि खाटी बात सि खावेवाली होय
[4] जेसे ओ ज मान आउरतिय न के चेतउनी देइत रहे कि अप्पन दुल्हवन आउर लइकन से परेम रखे
[5] आउर संज मी, पवित्तरइ, घर के काम ध्ंधा करेवाली, भल आउर अप्पन-अप्पन दुल्हा के अखि तयार में रहे वाली होय, जेसे परमेसर के बचन के सिकायत नञ हो स कय।
[6] अ इस ही ज मान आमदिय नो के स मझावल करऽ कि संज मी होय।
[7] स भ बात में अपनही अपना के भल काम के नमूना बनावऽ। तोहर उपदेस में स फाइ, गहिर ता,
[8] आउर अ इस न खरा पाय ल जाय कि कोइ ओकरा खराब नञ कह स कय, जेकरा से बिरोधी हमरा पर कोइ दोष लगावे के मउका नञ पाके लजा जाय।
[9] दासवन के स मझावऽ कि अप्पन- अप्पन मालिक के अ खि तयार में रहय, आउर सभ बात में ओहनी के खुस रखय, आउर उलट के ज वाब नञ दे
[10] चोरी-चकारी नञ करय, बाकि सभ त रह से पूरा बिस वासी निकस य कि ऊ सभ बात में हमनी के उद्धार करेवाला परमेसर के उपदेस के सोभा बढ़ावे।
[11] काहेकि परमेसर के ऊ किरपा परगट हे, जे सब आमदिय न के उद्धार के ओज ह हे,
[12] आउर हमनी के चेतउनी दे हइ कि हम बिना भक्ति आउर दुनियावी हिच्छा से मन फेरके ई जुग में संज मी, धरम, आउर भक्ति से जि नगी बितय अ इ;
[13] आउर ऊ धन्न आसा के माने अप्पन महान परमेसर आउर उद्धारकरेवाला यीसु मसीह के महिमा के परगट होवे के राह लक्खइत रहय।
[14] जे अपनही अपना के हमनी लागी दे देलथी कि हमनी के हरेक तरे के अ ध् रम से छुड़ा ले, आउर सुद्ध करके अपना लागी एगो अ इस न जात बना ले जे नीमन-नीमन काम में लगल रहे।
[15] स ऊँसे अखि तयार जोरे ई बात कहऽ, आउर स मझावऽ आउर सिखावइत रहऽ कोइ तोरा हेय नञ बूझो।