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[1] हम चाहऽ कि तोहनी जान लेहु कि तोहनी आउर उनका ला जे लौदीकिया में हथ, आउर ओहनी ला जे हमर देह वाला मुँह नञ देखलन, हम कयसन मेहनत करऽ ही,

[2] जे से उनकर मन में सानि्त हो आउर ओ परेम से अपना में बन्धल रहे, आउर ओ स ऊँसे स मझ के स ऊँसे दउलत पराप त करिय इ, आउर परमेसर पिता के मरम के माने मसीह के चिह्न लिअई।

[3] जेकरा में बुदि्ध आउर गियान के स ऊँसे खजाना छिप ल हइ।

[4] ई हम एहिसे कहऽ हियो कि कोइ आमदी तोहनी के मोहे वाला बात से धोखा नञ देवे।

[5] हालांकि हम देह के भाव से तोहनी से दूर ही, तइयो आतमा के भाव से तोहनी के नगीच ही, आउर तोहनी के बेबसि्थात जि नगी के आउर तोहनी के बिसवास के, जे मसीह में हे, मज गूती देखके खुस होवऽ ही।

[6] ईसे जइसे तोहनी मसीह यीसु के परभु करके स कार लेल्हु हे, ओय सही उनकरा में चलइत रहु,

[7] आउर उनका में ज ड़ पकड़इत आउर बढ़इत जा; आउर जइसे तोहनी सि खावल गेलऽ ओय सही बिसवास में मज गूत होइत जाहु, आउर जादे से जादे धन्य वाद करइत रहु।

[8] सचेत रहु कि कोय तोहनी के ऊ तत्व-गियान आउर बेउरथा धोखा के ज रिए अप्पण सि कार नञ बना ले, जे आमदिय न के परम्प रा आउर दुनिया के सुरू आती सीख के मोताबिक त हइ, बाकि मसीह के मोताबिक नञ।

[9] काहेकि मसीह में परमेसर के स ऊँसे परिपूरन रू पसे देह सहित वास करऽ हे,

[10] आउर तोहनी ओकरे में पूरन हो गेल हु जे स ऊँसे परधानता आउर अधिकार के सि रमउर हे।

[11] ओकरे में तोहनी के अयसन खतना होलइ हे जे हाँथा से नञ माने मसीह के खतना, जेकरा से देह के मांस उतार देल जा हे,

[12] आउर ओकरे जोरे बपतिसमा में गाड़ल गेलइ आउर ओकरे में परमेसर के स मारथा पर बिसवास करके, जे उनका मरल में से जि लाय लथी, उनके जोरे जीयो गेलथी।

[13] ऊ तोहनियो के, जे अप्पण अप राध आउर अप्पण देह के बिना खतना के हालत में मुरदा हलन, ओकरा जोरे जीया देलथी, आउर हमनी के सब अप राध के छमा कय लथी,

[14] आउर बिधी के लेख जे हमनी के नाँव पर आउर हमनी के खिलाप फ हल मेटा देलथी, आउर उनका कुरू स पर कांटी ठोक के सामने से हटा देलथी हे।

[15] आउर मसीह परधानता आउर अधिकार के ऊपर से उतार के उनकर खुल्लमखुल्ला तमासा बनय लथी आउर कुरू स के ज रिए ओहनी पर जीत के आवाज सुनय लथी।

[16] एहिसे खाय-पीये चाहे परब चाहे नया चान, चाहे सबत के बारे में तोहनी के कोय फइस ला नञ करे।

[17] काहेकि ई सभ आवे वाला बात के छाँहुर हइ, बाकि अस ल चीज मसीह के हइ।

[18] कोइ आमदी आतमा के दीनता आउर स रगदूतमन के उपासना कराके तोहनी के धउगे के इनाम से नञ ठगे। अइसन आमदी देखल बात में लगल रहऽ हे आउर अप्पण देह के स मझ पर बेकार पूफलऽ हे,

[19] आउर ऊ सि रमउर के पकड़ले नञ रहऽहे जेकरा से सँऊसे देह जोड़ आउर नस के ज रिए पालन-पोषण पाके आउर एक जोरे बन्धके, परमेसर दन्‍न से बढ़इत जा हे।

[20] ज बकि तोहनी मसीह के जोरे दुनिया के सुरू आती सीख दन्‍न से मर गेलऽ, त फिन काहे उनकरे ज कत जे दुनिया के हथ जि नगी बितावऽ हु? तोहनी अइस न बिधि के बस में काहे रहऽ हु

[21] कि ‘ई नञ छूवऽ,’ ‘ओकरा नञ चखऽ’, आउर ‘ओकरा हाँथा नञ लगावऽ’?

[22] (ई सभ चीज काम में लइते-लइते नष्ट हो जयतइ) काहेकि ई आमदिमन के आग्यां आउर सीख के मोताबिक हइ।

[23] ई विधिय न में अप्पण हिच्छा के मोताबिक गढ़ल भक्ति के ढंग, आउर आतमा के हीनता, आउर देह के योग अभ्यास के भाव से गिथान के नाँव त हे, बाकि देह के लालसा के रोके में एकरा से कुच्छे फाय दा नञ होवऽ हे।

कुलुस्सियन — Chapters