Skip to content
Opens in a new window
Listen to this chapter • 4:45

[1] जऊन ह बिसवास म कमजोर हवय, ओला अपन संगति म ले लव, पर ओकर अलग बिचार के ऊपर ओकर संग बहस झन करव।

[2] एक झन बिसवास करथे कि ओह जम्मो चीज ला खा सकथे, पर जऊन मनखे ह बिसवास म कमजोर हवय, ओह सोचथे कि सिरिप साग-भाजी खाना उचित ए।

[3] जऊन मनखे ह जम्मो चीज ला खाथे, ओह साग-भाजी खवइया ला तुछ झन समझय, अऊ जऊन ह सिरिप साग-भाजी खाथे, ओह जम्मो चीज खवइया मनखे ला दोसी झन ठहिरावय, काबरकि परमेसर ह ओला गरहन करे हवय।

[4] तेंह कोन अस कि आने के सेवक ऊपर दोस लगाथस? ओह सफल होथे या असफल हो जाथे, ये बात ओकर मालिक ले संबंध रखथे। अऊ ओ सेवक ह बिसवास म बने रहिही, काबरकि परभू ह ओला बिसवास म स्थिर कर सकथे।

[5] कोनो मनखे ह एक दिन ला आने दिन ले जादा महत्व के समझथे, त कोनो मनखे ह जम्मो दिन ला एके बरोबर समझथे। हर एक मनखे ला अपन सोच के बारे म निस्चय होना चाही।

[6] जऊन ह कोनो दिन ला बिसेस दिन समझथे, त ओह परभू बर अइसने समझथे। जऊन ह कुछू चीज ला खाथे, त ओह परभू के आदर म खाथे, काबरकि ओह परमेसर ला धनबाद देके खाथे, अऊ जऊन ह कुछू चीज ला खाय म परहेज करथे, ओह परभू के आदर म अइसने करथे अऊ परमेसर ला धनबाद देथे।

[7] काबरकि हमन ले कोनो न तो अपन खातिर जीथे, अऊ न कोनो अपन खातिर मरथे।

[8] यदि हमन जीयत हवन, त परभू खातिर जीयत हवन, अऊ यदि हमन मरथन, त परभू के खातिर मरथन। एकरसेति चाहे हमन जीयन या मरन, हमन परभू के अन।

[9] मसीह ह एकर कारन मरिस अऊ फेर जी उठिस कि ओह जीयत अऊ मरे दूनों मनखेमन के परभू होवय।

[10] तब तुमन काबर अपन भाई ऊपर दोस लगाथव? या अपन भाई ला काबर तुछ समझथव? हमन जम्मो झन ला परमेसर के नियाय आसन के आघू म ठाढ़ होना पड़ही।

[11] काबरकि परमेसर के बचन म ये लिखे हवय, “परभू ह कहिथे, ‘मोर जिनगी के कसम हर एक मनखे ह मोर आघू म माड़ी टेकही; हर एक मनखे ह परमेसर ला मानही।’ ”

[12] एकरसेति, हमन ले हर एक झन परमेसर ला अपन काम के लेखा-जोखा दीही।

[13] एकरसेति, हमन एक-दूसर के ऊपर दोस झन लगावन। पर अपन मन म, ये ठान लेवन कि हमन न तो अपन भाई के रसता म कोनो बाधा डालन अऊ न ही ओकर पाप म पड़े के कारन बनन।

[14] मेंह जानत हंव अऊ परभू यीसू के संगति म रहे के कारन मोला पूरा बिसवास हवय कि कोनो चीज ह अपनआप म असुध नइं होवय। पर कहूं कोनो मनखे कोनो चीज ला असुध समझथे, त फेर ओकर बर ओह असुध अय।

[15] कहूं तेंह कुछू अइसने खाना खाथस, जेकर ले तोर भाई ह उदास होथे, त फेर तेंह अपन भाई ले मया नइं करथस। अइसने खाना ला झन खा, जऊन ह कोनो मनखे के पाप म पड़े के कारन बनथे, जेकर बर मसीह ह मरिस।

[16] जऊन बात ला तुमन सही समझथव, ओकर बारे म कोनो मनखे ला खराप गोठियाय के मऊका झन देवव।

[17] काबरकि परमेसर के राज ह खाना अऊ पीना नो हय, पर येह धरमीपन, सांति अऊ आनंद के बात अय, जऊन ह पबितर आतमा ले मिलथे।

[18] जऊन ह अइसने मसीह के सेवा करथे, ओकर ले परमेसर ह खुस होथे अऊ मनखेमन घलो ओला सही समझथें।

[19] एकरसेति हमन ओ बातमन के ऊपर धियान लगावन, जेकर ले सांति होथे अऊ एक-दूसर के चालचलन ह सुधरथे।

[20] भोजन के खातिर परमेसर के काम ला झन बिगाड़व। वास्तव म, जम्मो भोजन ह सुध अय, पर यदि कोनो मनखे ह अइसने चीज ला खाथे, जऊन ला देखके आने मनखे ह पाप म गिरथे, त ओ खवइया ह गलत करथे।

[21] बने बात तो ये अय कि तुमन न तो मांस खावव, अऊ न ही मंद पीयव, अऊ न ही अइसने कोनो काम करव, जेकर ले तुम्हर भाई ह पाप म गिरय।

[22] अइसने चीजमन के बारे म, तोर जऊन बिसवास हवय, ओला अपन अऊ परमेसर के बीच म रहन दे। धइन ए ओ मनखे, जऊन ह कोनो चीज ला सही समझथे अऊ ओकर बारे म अपनआप ला दोसी नइं मानय।

[23] पर जऊन ह कुछू चीज ला संका करके खाथे, त ओला परमेसर ह दोसी ठहिराथे, काबरकि ओह बिसवास के संग नइं खावय; अऊ हर ओ काम जऊन ह बिसवास के संग नइं करे जावय, ओह पाप अय।

रोमीमन — Chapters