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[1] “लबारी बात झन फईलाहू। लबारी गवाही देके दोसी मनखे के मदद झन करव।

[2] “गलत काम करे म भीड़ के साथ झन देवव। जब अदालत म तुमन गवाही देथव, त भीड़ के तरफ होके नियाय ला झन बिगाड़व,

[3] अऊ मुकदमा म कोनो गरीब के तरफदारी झन करव।

[4] “कहूं तुम्हर बईरी के भटकत बईला या गदहा ह तुमन ला मिलय, त ओला ओकर मालिक करा जरूर अमरा दव।

[5] कहूं तुमन कोनो गदहा ला बोझा ले दबे देखथव, जेकर मालिक ह तुम्हर ले घिन करथे, त ओला उहां वइसनेच झन छोंड़व, पर ओकर मालिक संग मिलके ओकर जरूर मदद करव।

[6] “अपन गरीब मनखेमन के मुकदमा म ओमन के नियाय ला झन बिगाड़व।

[7] झूठा आरोप ले दूरिहा रहव अऊ निरदोस या ईमानदार मनखे के हतिया झन करव, काबरकि मेंह अपराधी ला निरदोस नइं छोड़ंव।

[8] “तुमन घूस झन लेवव, काबरकि घूस ह देखइया मनखे ला अंधरा कर देथे अऊ निरदोस मनखे के गोठ ला बिगाड़ देथे।

[9] “कोनो परदेसी के ऊपर अतियाचार झन करव; तुमन खुद जानत हव कि परदेसी होय के का मतलब होथे, काबरकि तुमन मिसर देस म परदेसी रहेव।

[10] “छै बछर ले तुमन अपन खेत ला बोवव अऊ फसल ला लुवव,

[11] पर सातवां बछर ओला झन जोतव अऊ परिया रहन दव। तब तुम्हर मनखेमन के बीच के गरीबमन ओमा ले खाय बर पावंय, अऊ ओमा के बांचे-खुचे ला जंगली पसुमन खावंय। अपन अंगूर के बारी अऊ जैतून के बगीचामन ला घलो अइसनेच करव।

[12] “हप्ता के छै दिन तुमन अपन काम करव, पर सातवां दिन काम झन करव, ताकि तुम्हर बईला अऊ गदहामन अराम करंय, अऊ तुम्हर परिवार म जनमे गुलाम अऊ तुम्हर बीच रहइया परदेसीमन तरो-ताजा हो सकंय।

[13] “जऊन कुछू मेंह तुमन ला कहे हवंव, ओला धियान देके करव। आने देवतामन के नांव मदद बर झन लेवव; ओमन के नांव घलो तुम्हर मुहूं ले झन निकलय।

[14] “साल म तीन बार तुमन मोर बर तिहार मनावव।

[15] “अखमीरी रोटी के तिहार मनावव; जइसे कि मेंह हुकूम दे हवंव, सात दिन ले बिगर खमीर ले बने रोटी खावव। येला ठहिराय गे समय अबीब के महिना म करव, काबरकि इही महिना म तुमन मिसर देस ले निकलके आय रहेव। “कोनो भी मनखे जुच्छा हांथ मोर करा झन आवय।

[16] “जब तुमन खेत म फसल लगाथव, अऊ ओह तियार हो जाथे, त ओकर पहिली-फसल लुवई के तिहार मनावव। “बछर के आखिरी म फसल संकेलई के तिहार मनावव, जब तुमन खेत म ले फसल ला संकेलथव।

[17] “हर बछर तीन बार तुम्हर जम्मो मरद परमपरधान यहोवा करा आवंय।

[18] “कोनो बलिदान करे गय पसु के लहू ला कोनो खमीर मिले हुए चीज के संग झन चघावव। “मोर तिहार-बलिदान के चरबी ला बिहान होवत तक झन रखव।

[19] “अपन भुइयां के सबले बने पहिली-फसल ला यहोवा अपन परमेसर के घर म लानव। “कोनो छेरी-पीला ला ओकर मियारी के दूध म झन रांधहू।

[20] “देखव, मेंह एक स्वरगदूत ला तुम्हर आघू-आघू भेजत हंव, ताकि रसता म ओह तुम्हर पहरेदारी करय अऊ तुमन ला ओ जगह म लानय, जेला मेंह तियार करे हंव।

[21] ओकर ऊपर धियान दव अऊ ओकर बात ला मानव। ओकर बिरूध बिदरोह झन करव; ओह तुम्हर बिदरोह ला छेमा नइं करही, काबरकि ओमा मोर नांव हवय।

[22] कहूं धियान लगाके तुमन ओकर बात ला सुनहू अऊ मोर कहे गय जम्मो चीज ला करहू, त मेंह तुम्हर बईरीमन के बईरी अऊ तुम्हर बिरोधीमन के बिरोधी बनहूं।

[23] मोर स्वरगदूत ह तुम्हर आघू-आघू जाही अऊ तुमन ला अमोरी, हित्ती, परिज्जी, कनानी, हिब्बी अऊ यबूसीमन के देस म ले जाही, अऊ मेंह ओमन ला नास कर दूहूं।

[24] ओमन के देवतामन के दंडवत झन करहू या ओमन के अराधना झन करहू या ओमन के रीति-रिवाज म झन चलहू। तुमन ओमन के देवता ला गिरा दव अऊ ओमन के पबितर पथरामन ला फोरके कुटा-कुटा कर दव।

[25] यहोवा अपन परमेसर के अराधना करव, अऊ ओह तुम्हर जेवन-पानी ला आसीस दीही। मेंह तुम्हर बीच म ले रोग-बेमारी ला दूरिहा कर दूहूं

[26] अऊ तुम्हर देस म कोनो माईलोगन के गरभ ह नइं गिरही या कोनो बांझ नइं होही। मेंह तुमन ला पूरा जिनगी जीये बर दूहूं।

[27] “मेंह अपन आतंक ला तुम्हर आघू-आघू पठोहूं, अऊ जऊन जाति के भी तुमन सामना करहू, ओमन म घबराहट फईला दूहूं। मेंह अइसे कर दूहूं कि तुम्हर जम्मो बईरीमन पीठ देखाके भागहीं।

[28] मेंह तुम्हर आघू-आघू बर्रामन ला पठोहूं, जेमन हिब्बी, कनानी अऊ हित्तीमन ला तुम्हर आघू ले भगा दीहीं।

[29] पर मेंह ओमन ला एकेच बछर म नइं भगावंव, काबरकि ओ देस ह उजर जाही, अऊ जंगली पसु बहुंत होय के कारन तुमन परेसानी म पड़ जाहू।

[30] धीरे-धीरे करके मेंह ओमन ला तुम्हर आघू ले भगाहूं, जब तक कि तुमन गनती म बढ़के ओ देस ऊपर अधिकार नइं कर लूहू।

[31] “मेंह लाल-समुंदर ले लेके भूमध्य सागर अऊ निरजन जगह ले लेके फरात नदी तक तुम्हर सीमना बनाहूं। ओ देस म रहइया मनखेमन ला मेंह तुम्हर हांथ म कर दूहूं, अऊ तुमन ओमन ला अपन आघू ले भगा दूहू।

[32] तुमन ओमन के संग या ओमन के देवतामन के संग कोनो करार झन करहू।

[33] तुमन ओमन ला अपन देस म रहे बर झन दूहू, नइं तो ओमन तुमन ला मोर बिरूध पाप करवाहीं, काबरकि ओमन के देवतामन के अराधना करई ह जरूर तुम्हर बर एक फांदा बन जाही।”

निरगमन — Chapters