[1] “येमन ओ कानून अंय, जेमन ला तें ओमन के आघू म बता:
[2] “कहूं तुमन कोनो इबरी सेवक ला बिसाथव, त ओह छै साल तक तुम्हर सेवा करय, पर सातवां साल ओह बिगर कोनो दाम चुकाय सुतंतर होके चले जावय।
[3] कहूं ओह एके झन आय हवय, त ओह अकेला सुतंतर होके चले जावय; पर कहूं ओकर आय के समय ओकर घरवाली ओकर संग म रहय, त ओकर घरवाली घलो ओकर संग चले जावय।
[4] कहूं ओकर मालिक ह कोनो माईलोगन ला ओकर घरवाली के रूप म देथे अऊ ओह बेटा या बेटीमन ला जनमथे, त ओ माईलोगन अऊ लइकामन मालिक के हो जाहीं, अऊ सिरिप ओ मनखे ह एके झन सुतंतर होके जावय।
[5] “पर कहूं ओ सेवक ह ये कहय, ‘मेंह अपन मालिक, अपन घरवाली अऊ अपन लइकामन ले मया करथंव, अऊ सुतंतर होके जाय बर नइं चाहत हंव,’
[6] तब जरूरी अय कि ओकर मालिक ह ओला नियायीमन करा लानय। मालिक ह ओला कपाट या चौखट करा ले जावय अऊ एक ठन सूजा ले ओकर कान ला छेदय। तब ओह जिनगी भर ओ मालिक के सेवक हो जाही।
[7] “कहूं कोनो मनखे ह अपन बेटी ला सेविका के रूप म बेच देथे, त ओ सेविका ह एक सेवक के सहीं सुतंतर होके झन जावय।
[8] कहूं ओकर मालिक ह ओकर ले खुस नइं ए, जऊन ह कि ओला अपन बर बिसाय रिहिस, त फेर जरूरी अय कि ओह ओ सेविका ला छोंड़ देवय। ओला अधिकार नइं ए कि ओह सेविका ला परदेसीमन करा बेच देवय, काबरकि ओह सेविका के संग बिसवास ला टोरे हवय।
[9] कहूं ओह ओ सेविका ला अपन बेटा बर चुनथे, त फेर जरूरी अय कि ओह ओ सेविका ला एक बेटी के अधिकार देवय।
[10] कहूं ओह आने माईलोगन ले बिहाव कर लेथे, तब येह जरूरी अय कि ओह ये सेविका के जेवन-पानी, कपड़ा अऊ ओकर बिहाव संबंधी अधिकार के खियाल रखय।
[11] कहूं ओह ओ सेविका के ये तीनों चीजमन के पूरती नइं करय, त फेर ओ सेविका ह बिगर कुछू दाम चुकाय सुतंतर होके जा सकत हे।
[12] “यदि कोनो मनखे ह आने मनखे ला अइसन जोर से मारय कि ओ मनखे ह मर जावय, त ओ मनखे घलो मार डारे जावय।
[13] पर यदि जानबूझके ये हतिया नइं करे गे हवय, पर परमेसर ह येला होवन दीस, त ओह एक अइसन जगह ला भाग जावय, जेला मेंह ठहिराहूं।
[14] पर यदि कोनो मनखे ह ताक धरके अऊ जानबूझके आने मनखे ला मार डारथे, त ओ मनखे ला मोर बेदी ले हटाय जावय अऊ मार डारे जावय।
[15] “कहूं कोनो मनखे ह अपन दाई या ददा ला मारथे-पीटथे, त ओला मार डारे जावय।
[16] “कोनो मनखे ह कोनो आने मनखे के अपहरन कर लेथे, त चाहे अपहरन करे गय मनखे ला बेच दिये गय हो या फेर ओह अपहरनकर्ता करा होवय, दूनों स्थिति म अपहरनकर्ता ला मार डारे जावय।
[17] “जऊन ह अपन दाई या ददा ला सराप देथे, ओला घलो मार डारे जावय।
[18] “कहूं दू झन म झगरा होथे अऊ एक झन ह दूसर ला पथरा म मारथे या मुटका मारथे, जेकर ले ओ दूसर मनखे ह मरय तो नइं, पर खटिया धर लेथे,
[19] अऊ यदि ओह लउठी के सहारा म चले-फिरे लगथे, त फेर चोट पहुंचानेवाला मनखे ला जिम्मेदार झन ठहिराय जावय; पर ओह चोट खाय मनखे के नुकसान के भरपई करय अऊ ओकर पूरा ठीक होवत तक ईलाज के खरचा उठावय।
[20] “कहूं कोनो मनखे ह अपन नर या नारी गुलाम ला लउठी या छड़ ले मारथे, जेकर ले ओह मर जाथे, त फेर ओ मनखे ला जरूर सजा मिलय,
[21] पर कहूं ओ गुलाम ह एक या दू दिन के बाद ठीक हो जाथे, त फेर ओ मनखे ला सजा झन दिये जावय, काबरकि ओ गुलाम ह ओकर संपत्ति अय।
[22] “कहूं मनखेमन झगरा करत रहिथें अऊ ये दौरान ओमा के कोनो के दुवारा कोनो देहें म रहे माईलोगन ला चोट लगथे अऊ समय के पहिली ओकर लइका ह जनमथे, पर कोनो गंभीर चोट नइं लगय, त ओ चोट पहुंचानेवाला मनखे ह माईलोगन के घरवाला के मांग अऊ अदालत के फैसला के मुताबिक जुरबाना भरय।
[23] पर कहूं ओला गंभीर चोट लगथे, त फेर तुमन परान के बलदा परान,
[24] आंखी के बलदा आंखी, दांत के बलदा दांत, हांथ के बलदा हांथ, गोड़ के बलदा गोड़,
[25] जरे के बलदा जलाके, घाव के बलदा घाव देके अऊ चोट के बलदा चोट पहुंचाके लव।
[26] “कहूं कोनो मालिक ह अपन नर या नारी गुलाम ला ओकर आंखी म मारथे, जेकर ले ओकर आंखी ह फूट जाथे, त ओह ओ गुलाम के आंखी के भरपई के बलदा म ओला छोंड़ दे।
[27] अऊ कोनो मालिक ह अपन नर अऊ नारी गुलाम ला अइसे मारथे कि ओकर दांत ह टूट जाथे, त ओह ओ गुलाम के दांत के भरपई के बलदा म ओला छोंड़ दे।
[28] “कहूं कोनो बईला ह कोनो आदमी या माईलोगन ला मारथे, जेकर ले ओह मर जाथे, त फेर ओ बईला ला पथरा फेंक-फेंकके मार डारे जावय, अऊ ओकर मांस ला झन खाय जावय। पर ओ बईला के मालिक ला जिम्मेदार झन ठहिराय जावय।
[29] पर कहूं कोनो बईला ला सींग मारे के आदत हवय अऊ ओकर मालिक ला चेताय के बाद घलो ओह ओला बांधके नइं रखय अऊ ओ बईला कोनो आदमी या माईलोगन ला मार डारथे, त ओ बईला ला पथरा फेंक-फेंकके मार डारे जावय अऊ ओकर मालिक ला घलो मार डारे जावय।
[30] पर यदि बईला के मालिक ले छुड़ौती बर पईसा के मांग करे जावय, त मालिक ह मांगे गय रकम के भुगतान करके अपन परान ला बचा सकथे।
[31] यदि बईला ह काकरो बेटा या बेटी ला मार डारथे, तब भी इही कानून लागू होथे।
[32] कहूं बईला ह कोनो नर या नारी गुलाम ला मार डारथे, त बईला के मालिक ह ओ गुलाम के मालिक ला तीस सेकेल चांदी देवय, अऊ ओ बईला ला पथरा फेंक-फेंकके मार डारे जावय।
[33] “कहूं कोनो खंचवा के ढकना ला खोलथे या खंचवा खनके ओला नइं तोपय अऊ ओमा कोनो बईला या गदहा ह गिर परय,
[34] त जऊन ह खंचवा ला खोले या खने रिहिस, ओह ओ पसु के मालिक ला नुकसान के भुगतान करय अऊ बलदा म मरे पसु ला ले लेवय।
[35] “कहूं काकरो बईला ह कोनो दूसर के बईला ला चोट पहुंचाथे अऊ ओ बईला ह मर जावय, त ओ दूनों झन ओ जीयत बईला ला बेचंय अऊ ओकर दाम अऊ मरे पसु दूनों ला आधा-आधा बांट लेवंय।
[36] पर कहूं पहिलीच ले ये पता रहय कि ओ बईला म आने ला मारे के आदत हवय, तभो ले ओकर मालिक ह ओला बांधके नइं रखय, त फेर मालिक ह ओ बईला के बलदा म बईला देवय अऊ बलदा म मरहा पसु ला ले लेवय।