[1] हे भाईमन हो, जब मेंह तुम्हर करा परमेसर के गवाही के परचार करत आएंव, त मेंह एक बने बक्ता के रूप म या उत्तम गियान के संग नइं आएंव।
[2] काबरकि जब मेंह तुम्हर संग रहेंव, त मेंह ये ठान ले रहेंव कि यीसू मसीह अऊ ओकर कुरूस ऊपर चघाय जाय के बात ला छोंड़ अऊ कोनो बात ला नइं जानंव।
[3] मेंह तुम्हर करा निरबल मनखे के रूप म भय के संग अऊ बहुंत कांपत आएंव।
[4] मोर संदेस अऊ परचार म गियान अऊ मोह लेवइया बात नइं रिहिस, पर येमा परमेसर के आतमा के सामर्थ के सबूत रिहिस,
[5] ताकि तुम्हर बिसवास ह मनखेमन के बुद्धि के ऊपर नइं, पर परमेसर के सामर्थ ऊपर निरभर रहय।
[6] तभो ले, हमन समझदार मनखेमन के बीच म गियान के बात जरूर बताथन, पर येह ये जुग के गियान या ये जुग म ओ सासन करइयामन के गियान नो हय, जऊन मन खतम हो जाहीं।
[7] पर हमन परमेसर के गुपत बुद्धि के बारे म गोठियाथन, जऊन ह लुकाय गे रिहिस अऊ जऊन ला परमेसर ह संसार ला बनाय के पहिली हमर महिमा बर ठहिराय रिहिस।
[8] ये जुग म सासन करइया कोनो घलो येला नइं समझिन, काबरकि यदि ओमन येला समझे रहितिन, त ओमन ओ महिमामय परभू ला कुरूस ऊपर चघाके नइं मारे होतिन।
[9] पर जइसने परमेसर के बचन म ये लिखे हवय: “जऊन चीज ला कोनो मनखे नइं देखे हवंय, जऊन बात ला कोनो मनखे नइं सुने हवंय, अऊ जऊन बात ला कोनो मनखे समझ नइं सकिन,” ओहीच बात ला परमेसर ह ओमन बर तियार करे हवय, जऊन मन ओकर ले मया करथें।
[10] पर परमेसर ह ये बात ला अपन आतमा के दुवारा हमन ला बताय हवय। आतमा ह हर एक चीज ला खोज लेथे, अऊ त अऊ परमेसर के गहरई के बातमन ला घलो।
[11] मनखेमन म कोन ए जऊन ह कोनो आने मनखे के मन के बात ला जानथे? सिरिप ओ मनखे के आतमा ही ओकरेच मन के बात ला जानथे। ओही किसम ले परमेसर के बातमन ला कोनो नइं जानय। सिरिप परमेसर के आतमा ही येला जानथे।
[12] हमन संसार के आतमा नइं पाय हवन, पर हमन परमेसर के पठोय आतमा ला पाय हवन, ताकि हमन ओ बात ला समझ सकन, जऊन ला परमेसर ह हमन ला मुफत म दे हवय।
[13] जऊन मन करा पबितर आतमा हवय, ओमन ला जब हमन आतमिक सच ला बताथन, त हमन मनखे के बुद्धि के दुवारा सिखोय बात ला नइं, पर पबितर आतमा के दुवारा सिखोय बातमन ला बताथन।
[14] जऊन मनखे करा पबितर आतमा नइं ए, ओह ओ बातमन ला गरहन नइं करय, जऊन ह परमेसर के आतमा करा ले आथे, काबरकि ओ बातमन ओकर बर मुरूखता के बात अंय, अऊ ओमन ला ओह नइं समझ सकय, काबरकि ओ बातमन ला सिरिप ओह समझ सकथे, जेकर करा पबितर आतमा हवय।
[15] जऊन मनखे करा पबितर आतमा हवय, ओह हर एक चीज ला सही या गलत रूप म परखथे, पर कोनो आने मनखे ओला परखे नइं सकंय।
[16] काबरकि, “परभू के मन ला कोन ह जाने हवय कि ओह ओला सिखोवय?” पर हमन करा मसीह के मन हवय।