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[1] कहूं मेंह मनखेमन अऊ स्वरगदूतमन के भासा म गोठियावंव, पर मया नइं रखंव, त मेंह सिरिप टनटनावत घंटा या फेर झनझनावत झांझ सहीं अंव।

[2] कहूं मोर करा अगमबानी करे के बरदान हवय, अऊ मेंह जम्मो भेद अऊ जम्मो गियान के बात ला समझथंव, अऊ कहूं मोला इहां तक बिसवास हवय कि मेंह पहाड़मन ला घलो हटा सकथंव; पर मया नइं रखंव, त मेंह कुछूच नो हंव।

[3] कहूं मेंह अपन जम्मो संपत्ति गरीबमन ला बांट देवंव अऊ अपन देहें ला जलाय बर दे दंव; पर मया नइं रखंव, त मोला कुछू फायदा नइं।

[4] मया ह धीरज धरथे अऊ येह दयालु ए। मया ह जलन नइं रखय, येह डींग नइं मारय, अऊ येह घमंड नइं करय।

[5] मया ह खराप बरताव नइं करय; येह अपन खुद के भलई नइं देखय, येह जल्दी गुस्सा नइं होवय; येह काकरो बात के बुरा नइं मानय।

[6] मया ह कुकरम ले खुस नइं होवय, पर सच बात ले खुस होथे।

[7] मया ह जम्मो बात ला सह लेथे, जम्मो बात ऊपर बिसवास करथे, जम्मो बात के आसा रखथे अऊ जम्मो बात म धीरज धरे रहिथे।

[8] मया ह कभू खतम नइं होवय। अगमबानी बंद हो जाही; आने-आने भासा म गोठियाई बंद हो जाही; गियान ह खतम हो जाही।

[9] काबरकि हमर गियान ह अधूरा हवय अऊ हमर अगमबानी ह अधूरा हवय,

[10] पर जब सर्वसिद्ध आही, त अधूरापन ह मिट जाही।

[11] जब मेंह लइका रहेंव, त लइकामन सहीं गोठियावत रहेंव, लइकामन सहीं सोचत रहेंव, अऊ मोर समझ ह लइकामन सहीं रिहिस। पर जब मेंह सियाना हो गेंव, त मेंह लइकापन के बात ला छोंड़ देंव।

[12] अभी हमन ला दरपन म धुंधला दिखथे, पर बाद म हमन आमने-सामने देखबो। अभी मेंह पूरा नइं जानत हंव, पर बाद म मेंह पूरा जानहूं, जइसने कि परमेसर ह मोला पूरा जान गे हवय।

[13] पर अब ये तीनों बचे हवंय: बिसवास, आसा अऊ मया। पर ये तीनों म सबले बड़े मया ए।

1 कुरिन्थुस — Chapters