[1] तुम्हारे बीच लड़ाइयों और झगड़ों का कारण क्या है? क्या तुम्हारे भीतर बुरी इच्छाओं के संघर्ष के कारण से नहीं?
[2] तुम लालसा करते हो, और तुम्हें मिलता नहीं। तुम हत्या और लालच करते हो और जो चाहते हो वह हासिल नहीं कर पाते। क्योंकि तुम्हें मिलता नहीं इसलिए दूसरों से छीना झपटी करते हो। तुम्हारे पास है नहीं, क्योंकि तुम परमेश्वर से माँगते नहीं हो।
[3] माँगने पर पाते इसलिए नहीं हो, क्योंकि गलत इरादे से माँगते हो, ताकि सिर्फ़ अपनी इच्छाओं को पूरा करो।
[4] हे व्यभिचारी लोगो क्या तुम्हें यह नहीं मालूम कि इस दुनिया की दोस्ती तुम्हें परमेश्वर का दुश्मन बनाती है? मैं फिर कहता हूँ कि यदि तुम्हारा मकसद इस दुनिया का मज़ा लूटना है, तुम परमेश्वर के दोस्त नहीं हो सकते।
[5] क्या तुम बाइबल में लिखी इस बात को बेकार समझते हो, परमेश्वर जिसने हमारे भीतर पवित्र आत्मा को रखा है, इस बात के लिए लालायित रहता है, कि हम विश्वासयोग्य बने रहें?
[6] बुरी इच्छाओं का डटकर मुकाबला करने के लिए वह ज्य़ादा से ज्य़ादा अनुग्रह देते हैं। जैसा कि बाइबल कहती है, परमेश्वर घमण्डी इन्सान का मुकाबला करते हैं, लेकिन नम्र पर कृपा करते हैं।
[7] इसलिए परमेश्वर के प्रति आधीन बन जाओ। शैतान का मुकाबला करो और वह तुम्हारे पास से भाग खड़ा होगा।
[8] परमेश्वर की नज़दीकी हासिल करो, तुम्हें भी उनकी नज़दीकी का अनुभव हो जाएगा। गुनाहगारों अपने हाथों को शुद्ध करो, दो मन वालो अपने मन को पवित्र करो।
[9] दुखी होओ, विलाप करो और रोओ। तुम्हारी हँसी रोने मे बदल जाए और खुशी निराशा में।
[10] परमेश्वर की निगाह में अपने आपको नम्र करो, तो वह तुम्हें आदर देंगे।
[11] एक दूसरे की बुराई मत करो। जो अपने भाई-बहन के खिलाफ़ में बोलता है और दोष लगाता है वह परमेश्वरीय नियम (व्यवस्था) की बदनामी करता है। यदि तुम परमेश्वरीय नियम पर दोष लगाते हो, तो नियम पर चलने वाले नहीं, लेकिन उसको दोषी ठहराने वाले हो गए,
[12] नियम (व्यवस्था) देने वाले एक ही हैं, जिन्हें बचाने और बर्बाद करने का अधिकार है। तुम किसी को अपराधी ठहराने वाले कौन हो?
[13] तुम जो कहते हो कि इन्हीं दिनों में और आने वाले दिनों में हम किसी दूसरे शहर जाकर एक साल व्यापार कर के कुछ कमाएँगे।
[14] सच्चाई तो यह है कि तुम्हें नहीं मालूम कि कल क्या होगा, तुम्हारा जीवन है ही क्या? यह भाप की तरह है कुछ पल दिखती है, फिर गायब हो जाती है।
[15] इसके बजाए तुम्हें यह कहना चाहिए कि अगर यीशु चाहें तो हम ज़िन्दा रहेंगे और यह या वह काम करेंगे।
[16] लेकिन तुम तो अपनी योजनाओं के सिलसिले में घमण्ड करते हो। हर तरह का घमण्ड बुरा है।
[17] इसलिए जो भलाई करना जानता है, लेकिन करता नहीं, यह गुनाह है।