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[1] यह सुन मोशेह ने पूछा, “क्या होगा जब वे मेरी बात का न विश्वास करें और ना माने, और कहें, ‘यह असंभव है कि याहवेह तुम पर प्रकट हुए हों?’ ”

[2] याहवेह ने उन्हें उत्तर दिया, “तुम्हारे हाथ में क्या है?” मोशेह ने उत्तर दिया, “एक लाठी.”

[3] याहवेह ने कहा, “उसे भूमि पर डाल दो!” तब मोशेह ने उसे भूमि पर डाल दिया. वह लाठी सांप बन गई, मोशेह डरकर दूर चले गए.

[4] याहवेह ने मोशेह से कहा “अपना हाथ बढ़ाकर उसकी पूंछ पकड़ लो” तब मोशेह ने अपना हाथ बढ़ाकर उसे पकड़ लिया और वह उनके हाथ में आते ही लाठी बन गई!

[5] याहवेह ने कहा, “यह देखकर वे विश्वास करेंगे कि तुम्हारे पूर्वजों के परमेश्वर, अब्राहाम, यित्सहाक तथा याकोब के परमेश्वर ही, तुम पर प्रकट हुए हैं.”

[6] फिर याहवेह ने मोशेह से दुबारा कहा “अब अपना हाथ वस्त्र के भीतर अपनी छाती पर रखो.” मोशेह ने अपना हाथ अपनी छाती पर रखकर बाहर निकाला, तुरंत उनका हाथ कुष्ठ के कारण हिम जैसा श्वेत हो गया.

[7] तब याहवेह ने उनसे कहा कि, “अपना हाथ वापस अपनी छाती पर रखो.” मोशेह ने अपना हाथ वापस अपनी छाती पर रखा; और जब उन्होंने अपना हाथ छाती से बाहर निकाला, वह वापस पहले जैसा सही हो गया.

[8] “यदि वे तुम्हारी बात का विश्वास न करें या उस पहले वाले चिन्ह को न माने, हो सकता है कि वे दूसरे चिन्ह पर विश्वास कर लें.

[9] किंतु यदि वे इन दोनों चिन्हों पर भी विश्वास न करें और तुम्हारी बात को भी न माने, तब तुम नील नदी से कुछ जल लेकर सूखी भूमि पर डाल देना; नील नदी से लिया गया वह जल सूखी भूमि पर डालते ही खून बन जाएगा.”

[10] तब मोशेह ने याहवेह से कहा, “याहवेह परमेश्वर मुझे माफ करे, मैं अच्छी तरह से बोल नहीं सकता हूं, पहले भी नहीं बोल सकता था और न जब से आपने अपने दास से बात करी थी, मेरी ज़ुबान तुतली और धीमी हैं!”

[11] याहवेह ने उनसे पूछा, “किसने मनुष्य का मुंह बनाया हैं? कौन उसे गूंगा या बहिरा बनाता हैं? कौन है जो उसको बोलने की शक्ति या देखने के लिए रोशनी देता है? क्या मैं, स्वयं याहवेह नहीं?

[12] इसलिये अब जाओ. मैं, हां, मैं तुम्हें बोलने के योग्य बनाऊंगा, मैं ही तुम्हें बताऊंगा, कि तुम्हें क्या बोलना है.”

[13] किंतु मोशेह ने मना किया और कहा, “प्रभु अपने दास को माफ कर दे, कृपया आप किसी दूसरे को भेज दीजिए.”

[14] याहवेह मोशेह से नाराज हुए. उन्होंने मोशेह से कहा, “तुम्हारा भाई, अहरोन, जो लेवी है? वह तुमसे मिलने यहीं आ रहा है. तुम्हें देखकर वह खुश हो जाएगा.

[15] तुम उसे यह सब बताना और उसके मुंह में बातें डालना इसके अलावा मैं—हां मैं, तुम दोनों की बोलने में सहायता करूंगा, मैं तुम दोनों को सही मार्ग पर चलना सिखाऊंगा.

[16] वे तुम्हारी ओर से लोगों से बात करेगा व तुम अहरोन के प्रभु समान होगे.

[17] इस लाठी को तुम अपने हाथ में ही रखना, इसी से तुम अद्भुत काम कर पाओगे.”

[18] मोशेह वहां से आकर अपने ससुर येथेर से मिलने गए और उनसे कहा कि, “कृपया मुझे जाने दीजिए ताकि मैं मिस्र देश में अपने भाई-बंधुओं से मिलकर पता करूं कि उनमें से कोई अब भी ज़िंदा है या नहीं.” येथेर ने उनसे कहा, “आप लोग खुशी से जाओ.”

[19] मिदियन देश में ही मोशेह को याहवेह की ओर से यह आश्वासन मिल चुका था कि मिस्र देश को लौट जाओ, क्योंकि उन सभी की मृत्यु हो चुकी है, जो तुम्हारी हत्या के लिए आये थे.

[20] फिर मोशेह अपनी पत्नी एवं पुत्रों को गधे पर बैठाकर मिस्र देश को लौट गए. परमेश्वर के कहे अनुसार मोशेह ने लाठी अपने हाथ में ली हुई थी.

[21] याहवेह ने मोशेह से कहा, “मिस्र देश पहुंचकर तुम वो सभी चिन्ह फ़रोह को दिखाना जो मैंने तुम्हारे वश में किए हैं, परंतु मैं फ़रोह के मन को कठोर कर दूंगा, और वह इस्राएलियों को जाने न देगा.

[22] तब तुम फ़रोह से कहना, ‘याहवेह का संदेश यह है: इस्राएल मेरा पुत्र—मेरा पहलौंठा है.

[23] यह मेरा आदेश है कि मेरे पुत्र को जाने दो, कि वह मेरी आराधना कर सके; परंतु तुम उन्हें जाने नहीं दे रहे हो. इस कारण मैं तुम्हारे बड़े बेटे को मार दूंगा.’ ”

[24] मार्ग में सराय पर याहवेह मोशेह के पास आए कि उनको मार दें.

[25] लेकिन ज़ीप्पोराह ने एक नुकीले पत्थर से अपने पुत्र की खलड़ी को काटकर मोशेह के पैरों पर डाल दिया और कहा, “आप लहू बहानेवाले मेरे पति हैं!”

[26] इसलिये याहवेह ने मोशेह को नहीं छुआ. यही वह समय था जब ज़ीप्पोराह ने कहा था कि, “आप वास्तव में रक्त बहानेवाले पति हैं,” क्योंकि उसी समय ख़तना किया था.

[27] याहवेह ने अहरोन से कहा, “निर्जन प्रदेश में जाकर मोशेह से मिलो.” और अहरोन परमेश्वर के पर्वत पर गये और मोशेह से मिले. अहरोन ने मोशेह का चुंबन किया.

[28] मोशेह ने अहरोन को वह सब बातें बताई जिन्हें कहने के लिये याहवेह ने उसे भेजा हैं. मोशेह ने वह अद्भुत चिन्ह भी बताए, जिन्हें याहवेह ने मोशेह को करने कि आज्ञा दी थी.

[29] मोशेह तथा अहरोन ने इस्राएलियों के सब प्रधानों को बुलाया.

[30] अहरोन ने उनको वह सब बात बताई, जो याहवेह ने मोशेह को कही थी. फिर उन्होंने सब लोगों के सामने वह चिन्ह भी दिखाये.

[31] चिन्ह देखकर लोगों ने इनका विश्वास किया और जब उन्हें यह पता चला कि याहवेह ने इस्राएलियों की ओर कान लगाया हैं और उनके दुखों की ओर ध्यान दिया है, उन्होंने झुककर प्रणाम किया और परमेश्वर की आराधना करी.

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