[1] फिर याहवेह ने मोशेह से कहा इस्राएलियों से कहो कि वे
[2] मेरे लिए भेंट लाएं. और तुम यह भेंट उन्हीं से लेना जो अपनी इच्छा से दे. li4
[3] “ये हैं भेंटे जो तुम उनसे प्राप्त करोगे: “सोना, चांदी, तांबा,
[4] नीले, बैंगनी तथा लाल रंग के वस्त्र, मलमल के वस्त्र बकरे के रोम,
[5] लाल रंग में रंगी गई मेमने की खाल, सूंस की खाल, बबूल की लकड़ी,
[6] दीये के लिए तेल, अभिषेक का तेल और सुगंधित धूप के लिए सुगंध द्रव्य लेना;
[7] एफ़ोद तथा सीनाबंद के लिए मणि एवं मूल्यवान पत्थर लेना.
[8] “और मेरे लिए एक पवित्र स्थान बनाना. ताकि मैं उनके बीच रहूं.
[9] पवित्र स्थान के लिये जैसा मैं तुमको बताऊं वैसा ही सामान लेना और उसी तरीके से बनाना.
[10] “उन्हीं बबूल की लकड़ी से एक संदूक बनाना, जिसकी लंबाई एक सौ दस सेंटीमीटर तथा चौड़ाई और ऊंचाई सत्तर-सत्तर सेंटीमीटर हो.
[11] और इसके अंदर और बाहर सोना लगाना. और संदूक के ऊपर चारों और सोने की किनारी लगाना.
[12] इसके चारों पायों पर लगाने के लिए सोने के चार कड़े बनाना; सोने के कड़ो को चारों कोनों पर लगाना—दो कड़े एक तरफ और, दो कड़े दूसरी तरफ हों.
[13] फिर बबूल की लकड़ी से डंडे बनवाना, उस पर भी सोना लगाना.
[14] डंडों को दोनों तरफ के कड़ों में डालना ताकि संदूक को उठाना आसान हो.
[15] डंडे को संदूक की कड़ो में से न हटाना.
[16] मैं तुम्हें एक साक्षी पत्र दूंगा उसे उस संदूक में रखना.
[17] “सोने से कृपासन बनाना, जो एक सौ दस सेंटीमीटर लंबा तथा सत्तर सेंटीमीटर चौड़ा होगा.
[18] सोने के पत्रों से दो करूबों को बनाकर कृपासन के दोनों ओर लगाना.
[19] एक करूब एक तरफ तथा दूसरा करूब दूसरी तरफ लगाना. ये करूब कृपासन के साथ ऐसे जुड़े हों मानो यह एक ही हो.
[20] करूबों के पंख ऊपर से ऐसे खुले हो जिससे कृपासन उनसे ढका रह सके और वे एक दूसरे के आमने-सामने तथा उनका मुंह कृपासन की ओर झुका हुआ हों.
[21] कृपासन को संदूक के ऊपर लगाना और साक्षी पत्र जो मैं तुम्हें दूंगा उसे संदूक के अंदर रखना.
[22] और मैं कृपासन के ऊपर से तुमसे मिलूंगा और इस्राएलियों के लिए जितनी आज्ञा मैं तुम्हें दूंगा वह संदूक के अंदर रखना.
[23] “तुम बबूल की लकड़ी से एक मेज़ बनाना. जो नब्बे सेंटीमीटर लंबी, पैंतालीस सेंटीमीटर चौड़ी और साढ़े सड़सठ सेंटीमीटर ऊंची होगी.
[24] मेज़ पर पूरा सोना लगाना मेज़ की किनारी भी सोने की बनाना.
[25] मेज़ के चारों ओर सोने की साढ़े सात सेंटीमीटर चौड़ी पट्टी लगाना और चारों तरफ से इस पट्टी को सोने से मढ़ना.
[26] मेज़ के लिए सोने के चार कड़े बनाना और मेज़ के चारों कोनों पर इन सोने के कड़े लगाना.
[27] कड़े पट्टी के पास लगाना ताकि मेज़ उठाने के लिये डंडे इन कड़ों में डाले जा सके.
[28] डंडे बबूल की लकड़ी से बनाकर उस पर सोना चढ़ाना. डंडे के सहारे ही मेज़ को उठाया जाए.
[29] तुम धूप के लिए बर्तन, कटोरे तथा सुराहियां, चम्मच सब सोने से बनवाना.
[30] मेज़ पर मेरे सामने भेंट की रोटी हमेशा रखना.
[31] “फिर शुद्ध सोने का एक दीप का स्तंभ बनाना. उसे पीटकर आधार तथा उसके डंडे को बनाना और उसने फूलों के समान दिखनेवाले प्याले बनाना. प्यालों के साथ कलियां और खिले हुए पुष्प हो. हर एक चीज़ शुद्ध सोने की बनाना. ये सभी चीज़ें एक ही इकाई में परस्पर जुड़ी हुई हो.
[32] दीये से छः डालियां निकले, तीन एक तरफ और तीन दूसरी तरफ रखना.
[33] हर डाली में बदाम के फूल जितनी तीन कली, एक गांठ हो, और एक फूल दीये से बाहर निकली हुई, पूरे छः: डालियों को इसी आकार से बनाना.
[34] दीये की डंडी में चार फूल बनाना, जिसमें बादाम के फूल के समान कलियां तथा पंखुड़ियां बनाना.
[35] दीये से निकली हुई छः डालियों में से दो-दो डालियों के नीचे एक-एक गांठ हो और दीये समेत एक ही टुकड़े से बने हो.
[36] कलियां, शाखाएं और दीप का स्तंभ शुद्ध सोने को पीटकर बने हो.
[37] “सात दीये बनाना और सातों दीयों को जलाए रखना ताकि वे रोशनी दे सके.
[38] चिमटियां तथा इन्हें रखने के बर्तन भी सोने के हों.
[39] ये पूरा सामान लगभग पैंतीस किलो सोने से बना हो.
[40] सावधानी से इन सभी चीज़ों को बिलकुल वैसा ही बनाना जैसा तुम्हें पर्वत पर दिखाया गया था.