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[1] उन दिनों जब क़ाज़ी क़ौम की राहनुमाई किया करते थे तो इस्राईल में काल पड़ा। यहूदाह के शहर बैत-लहम में एक इफ़्राती आदमी रहता था जिस का नाम इलीमलिक था। काल की वजह से वह अपनी बीवी नओमी और अपने दो बेटों महलोन और किल्योन को ले कर मुल्क-ए-मोआब में जा बसा।

[3] लेकिन कुछ देर के बाद इलीमलिक फ़ौत हो गया, और नओमी अपने दो बेटों के साथ अकेली रह गई।

[4] महलोन और किल्योन ने मोआब की दो औरतों से शादी कर ली। एक का नाम उर्फा था और दूसरी का रूत। लेकिन तक़रीबन दस साल के बाद

[5] दोनों बेटे भी जाँ-ब-हक़ हो गए। अब नओमी का न शौहर और न बेटे ही रहे थे।

[6] एक दिन नओमी को मुल्क-ए-मोआब में ख़बर मिली कि रब अपनी क़ौम पर रहम करके उसे दुबारा अच्छी फ़सलें दे रहा है। तब वह अपने वतन यहूदाह के लिए रवाना हुई। उर्फा और रूत भी साथ चलीं। जब वह उस रास्ते पर आ गईं जो यहूदाह तक पहुँचाता है

[8] तो नओमी ने अपनी बहूओं से कहा, “अब अपने माँ-बाप के घर वापस चली जाएँ। रब आप पर उतना रहम करे जितना आप ने मरहूमों और मुझ पर किया है।

[9] वह आप को नए घर और नए शौहर मुहय्या करके सुकून दे।” यह कह कर उस ने उन्हें बोसा दिया। दोनों रो पड़ीं

[10] और एतिराज़ किया, “हरगिज़ नहीं, हम आप के साथ आप की क़ौम के पास जाएँगी।”

[11] लेकिन नओमी ने इसरार किया, “बेटियो, बस करें और अपने अपने घर वापस चली जाएँ। अब मेरे साथ जाने का क्या फ़ाइदा? मुझ से तो मज़ीद कोई बेटा पैदा नहीं होगा जो आप का शौहर बन सके।

[12] नहीं बेटियो, वापस चली जाएँ। मैं तो इतनी बूढ़ी हो चुकी हूँ कि दुबारा शादी नहीं कर सकती। और अगर इस की उम्मीद भी होती बल्कि मेरी शादी आज रात को होती और मेरे हाँ बेटे पैदा होते

[13] तो क्या आप उन के बालिग़ हो जाने तक इन्तिज़ार कर सकतीं? क्या आप उस वक़्त तक किसी और से शादी करने से इन्कार करतीं? नहीं, बेटियो। रब ने अपना हाथ मेरे ख़िलाफ़ उठाया है, तो आप इस लानत की ज़द में क्यूँ आएँ?”

[14] तब उर्फा और रूत दुबारा रो पड़ीं। उर्फा ने अपनी सास को चूम कर अलविदा कहा, लेकिन रूत नओमी के साथ लिपटी रही।

[15] नओमी ने उसे समझाने की कोशिश की, “देखें, उर्फा अपनी क़ौम और अपने देवताओं के पास वापस चली गई है। अब आप भी ऐसा ही करें।”

[16] लेकिन रूत ने जवाब दिया, “मुझे आप को छोड़ कर वापस जाने पर मज्बूर न कीजिए। जहाँ आप जाएँगी मैं जाऊँगी। जहाँ आप रहेंगी वहाँ मैं भी रहूँगी। आप की क़ौम मेरी क़ौम और आप का ख़ुदा मेरा ख़ुदा है।

[17] जहाँ आप मरेंगी वहीं मैं मरूँगी और वहीं दफ़न हो जाऊँगी। सिर्फ़ मौत ही मुझे आप से अलग कर सकती है। अगर मेरा यह वादा पूरा न हो तो अल्लाह मुझे सख़्त सज़ा दे!”

[18] नओमी ने जान लिया कि रूत का साथ जाने का पक्का इरादा है, इस लिए वह ख़ामोश हो गई और उसे समझाने से बाज़ आई।

[19] वह चल पड़ीं और चलते चलते बैत-लहम पहुँच गईं। जब दाख़िल हुईं तो पूरे शहर में हलचल मच गई। औरतें कहने लगीं, “क्या यह नओमी नहीं है?”

[20] नओमी ने जवाब दिया, “अब मुझे नओमी मत कहना बल्कि मारा, क्यूँकि क़ादिर-ए-मुतलक़ ने मुझे सख़्त मुसीबत में डाल दिया है।

[21] यहाँ से जाते वक़्त मेरे हाथ भरे हुए थे, लेकिन अब रब मुझे ख़ाली हाथ वापस ले आया है। चुनाँचे मुझे नओमी मत कहना। रब ने ख़ुद मेरे ख़िलाफ़ गवाही दी है, क़ादिर-ए-मुतलक़ ने मुझे इस मुसीबत में डाला है।”

[22] जब नओमी अपनी मोआबी बहू के साथ बैत-लहम पहुँची तो जौ की फ़सल की कटाई शुरू हो चुकी थी।

रूत — Chapters