[1] मैं बोला, “ऐ याक़ूब के राहनुमाओ, ऐ इस्राईल के बुज़ुर्गो, सुनो! तुम्हें इन्साफ़ को जानना चाहिए।
[2] लेकिन जो अच्छा है उस से तुम नफ़रत करते और जो ग़लत है उसे प्यार करते हो। तुम मेरी क़ौम की खाल उतार कर उस का गोश्त हड्डियों से जुदा कर लेते हो।
[3] क्यूँकि तुम मेरी क़ौम का गोश्त खा लेते हो। उन की खाल उतार कर तुम उन की हड्डियों और गोश्त को टुकड़े टुकड़े करके देग में फैंक देते हो।”
[4] तब वह चिल्ला कर रब से इल्तिजा करेंगे, लेकिन वह उन की नहीं सुनेगा। उन के ग़लत कामों के सबब से वह अपना चेहरा उन से छुपा लेगा।
[5] रब फ़रमाता है, “ऐ नबियो, तुम मेरी क़ौम को भटका रहे हो। अगर तुम्हें कुछ खिलाया जाए तो तुम एलान करते हो कि अम्न-ओ-अमान होगा। लेकिन जो तुम्हें कुछ न खिलाए उस पर तुम जिहाद का फ़त्वा देते हो।
[6] चुनाँचे तुम पर ऐसी रात छा जाएगी जिस में तुम रोया नहीं देखोगे, ऐसी तारीकी जिस में तुम्हें मुस्तक़बिल के बारे में कोई भी बात नहीं मिलेगी। नबियों पर सूरज डूब जाएगा, उन के चारों तरफ़ अंधेरा ही अंधेरा छा जाएगा।
[7] तब रोया देखने वाले शर्मसार और क़िस्मत का हाल बताने वाले शर्मिन्दा हो जाएंगे। शर्म के मारे वह अपने मुँह को छुपा लेंगे, क्यूँकि अल्लाह से कोई भी जवाब नहीं मिलेगा।”
[8] लेकिन मैं ख़ुद क़ुव्वत से, रब के रूह से और इन्साफ़ और ताक़त से भरा हुआ हूँ ताकि याक़ूब की औलाद को उस के जराइम और इस्राईल को उस के गुनाह सुना सकूँ।
[9] ऐ याक़ूब के राहनुमाओ, ऐ इस्राईल के बुज़ुर्गो, सुनो! तुम इन्साफ़ से घिन खा कर हर सीधी बात को टेढ़ी बना लेते हो।
[10] तुम सिय्यून को ख़ूँरेज़ी से और यरूशलम को नाइन्साफ़ी से तामीर कर रहे हो।
[11] यरूशलम के बुज़ुर्ग अदालत करते वक़्त रिश्वत लेते हैं। उस के इमाम तालीम देते हैं लेकिन सिर्फ़ कुछ मिलने के लिए। उस के नबी पेशगोई सुना देते हैं लेकिन सिर्फ़ पैसों के मुआवज़े में। ताहम यह लोग रब पर इन्हिसार करके कहते हैं, “हम पर आफ़त आ ही नहीं सकती, क्यूँकि रब हमारे दरमियान है।”
[12] तुम्हारी वजह से सिय्यून पर हल चलाया जाएगा और यरूशलम मल्बे का ढेर बन जाएगा। जिस पहाड़ पर रब का घर है उस पर जंगल छा जाएगा।