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[1] उन दिनों में, हाँ उस वक़्त जब मैं यहूदाह और यरूशलम को बहाल करूँगा

[2] मैं तमाम दीगर अक़्वाम को जमा करके वादी-ए-यहूसफ़त में ले जाऊँगा। वहाँ मैं अपनी क़ौम और मौरूसी मिलकियत की ख़ातिर उन से मुक़द्दमा लड़ूँगा। क्यूँकि उन्हों ने मेरी क़ौम को दीगर अक़्वाम में मुन्तशिर करके मेरे मुल्क को आपस में तक़्सीम कर लिया,

[3] क़ुरआ डाल कर मेरी क़ौम को आपस में बाँट लिया है। उन्हों ने इस्राईली लड़कों को कस्बियों के बदले में दे दिया और इस्राईली लड़कियों को फ़रोख़्त किया ताकि मै ख़रीद कर पी सकें।

[4] ऐ सूर, सैदा और तमाम फ़िलिस्ती इलाक़ो, मेरा तुम से क्या वास्ता? क्या तुम मुझ से इन्तिक़ाम लेना या मुझे सज़ा देना चाहते हो? जल्द ही मैं तेज़ी से तुम्हारे साथ वह कुछ करूँगा जो तुम ने दूसरों के साथ किया है।

[5] क्यूँकि तुम ने मेरी सोना-चाँदी और मेरे बेशक़ीमत ख़ज़ाने लूट कर अपने मन्दिरों में रख लिए हैं।

[6] यहूदाह और यरूशलम के बाशिन्दों को तुम ने यूनानियों के हाथ बेच डाला ताकि वह अपने वतन से दूर रहें।

[7] लेकिन मैं उन्हें जगा कर उन मक़ामों से वापस लाऊँगा जहाँ तुम ने उन्हें फ़रोख़्त कर दिया था। साथ साथ मैं तुम्हारे साथ वह कुछ करूँगा जो तुम ने उन के साथ किया था।

[8] रब फ़रमाता है कि मैं तुम्हारे बेटे-बेटियों को यहूदाह के बाशिन्दों के हाथ बेच डालूँगा, और वह उन्हें दूरदराज़ क़ौम सबा के हवाले करके फ़रोख़्त करेंगे।

[9] बुलन्द आवाज़ से दीगर अक़्वाम में एलान करो कि जंग की तय्यारियाँ करो। अपने बेहतरीन फ़ौजियों को खड़ा करो। लड़ने के क़ाबिल तमाम मर्द आ कर हम्ला करें।

[10] अपने हल की फालियों को कूट कूट कर तलवारें बना लो, काँट-छाँट के औज़ारों को नेज़ों में तब्दील करो। कमज़ोर आदमी भी कहे, ‘मैं सूरमा हूँ!’

[11] ऐ तमाम अक़्वाम, चारों तरफ़ से आ कर वादी में जमा हो जाओ! जल्दी करो।” ऐ रब, अपने सूरमाओं को वहाँ उतरने दे!

[12] “दीगर अक़्वाम हरकत में आ कर वादी-ए-यहूसफ़त में आ जाएँ। क्यूँकि वहाँ मैं तख़्त पर बैठ कर इर्दगिर्द की तमाम अक़्वाम का फ़ैसला करूँगा।

[13] आओ, दरान्ती चलाओ, क्यूँकि फ़सल पक गई है। आओ, अंगूर को कुचल दो, क्यूँकि उस का रस निकालने का हौज़ भरा हुआ है, और तमाम बर्तन रस से छलकने लगे हैं। क्यूँकि उन की बुराई बहुत है।”

[14] फ़ैसले की वादी में हंगामा ही हंगामा है, क्यूँकि फ़ैसले की वादी में रब का दिन क़रीब आ गया है।

[15] सूरज और चाँद तारीक हो जाएंगे, सितारों की चमक-दमक जाती रहेगी।

[16] रब कोह-ए-सिय्यून पर से दहाड़ेगा, यरूशलम से उस की गरजती आवाज़ यूँ सुनाई देगी कि आसमान-ओ-ज़मीन लरज़ उठेंगे। लेकिन रब अपनी क़ौम की पनाहगाह और इस्राईलियों का क़िला होगा।

[17] “तब तुम जान लोगे कि मैं, रब तुम्हारा ख़ुदा हूँ और अपने मुक़द्दस पहाड़ सिय्यून पर सुकूनत करता हूँ। यरूशलम मुक़द्दस होगा, और आइन्दा परदेसी उस में से नहीं गुज़रेंगे।

[18] उस दिन हर चीज़ कस्रत से दस्तयाब होगी। पहाड़ों से अंगूर का रस टपकेगा, पहाड़ियों से दूध की नदियाँ बहेंगी, और यहूदाह के तमाम नदी-नाले पानी से भरे रहेंगे। नीज़, रब के घर में से एक चश्मा फूट निकलेगा और बहता हुआ वादी-ए-शित्तीम की आबपाशी करेगा।

[19] लेकिन मिस्र तबाह और अदोम वीरान-ओ-सुन्सान हो जाएगा, क्यूँकि उन्हों ने यहूदाह के बाशिन्दों पर ज़ुल्म-ओ-तशद्दुद किया, उन के अपने ही मुल्क में बेक़ुसूर लोगों को क़त्ल किया है।

[20] लेकिन यहूदाह हमेशा तक आबाद रहेगा, यरूशलम नस्ल-दर-नस्ल क़ाइम रहेगा।

[21] जो क़त्ल-ओ-ग़ारत उन के दरमियान हुई है उस की सज़ा मैं ज़रूर दूँगा।” रब कोह-ए-सिय्यून पर सुकूनत करता है।!

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