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[1] ऐ नबी, इस्राईल के रईसों पर मातमी गीत गा,

[2] ‘तेरी माँ कितनी ज़बरदस्त शेरनी थी। जवान शेरबबरों के दरमियान ही अपना घर बना कर उस ने अपने बच्चों को पाल लिया।

[3] एक बच्चे को उस ने ख़ास तर्बियत दी। जब बड़ा हुआ तो जानवरों को फाड़ना सीख लिया, बल्कि इन्सान भी उस की ख़ुराक बन गए।

[4] इस की ख़बर दीगर अक़्वाम तक पहुँची तो उन्हों ने उसे अपने गढ़े में पकड़ लिया। वह उस की नाक में काँटे डाल कर उसे मिस्र में घसीट ले गए।

[5] जब शेरनी के इस बच्चे पर से उम्मीद जाती रही तो उस ने दीगर बच्चों में से एक को चुन कर उसे ख़ास तर्बियत दी।

[6] यह भी ताक़तवर हो कर दीगर शेरों में घूमने फिरने लगा। उस ने जानवरों को फाड़ना सीख लिया, बल्कि इन्सान भी उस की ख़ुराक बन गए।

[7] उन के क़िलों को गिरा कर उस ने उन के शहरों को ख़ाक में मिला दिया। उस की दहाड़ती आवाज़ से मुल्क बाशिन्दों समेत ख़ौफ़ज़दा हो गया।

[8] तब इर्दगिर्द के सूबों में बसने वाली अक़्वाम उस से लड़ने आईं। उन्हों ने अपना जाल उस पर डाल दिया, उसे अपने गढ़े में पकड़ लिया।

[9] वह उस की गर्दन में पट्टा और नाक में काँटे डाल कर उसे शाह-ए-बाबल के पास घसीट ले गए। वहाँ उसे क़ैद में डाला गया ताकि आइन्दा इस्राईल के पहाड़ों पर उस की गरजती आवाज़ सुनाई न दे।

[10] तेरी माँ पानी के किनारे लगाई गई अंगूर की सी बेल थी। बेल कस्रत के पानी के बाइस फलदार और शाख़दार थी।

[11] उस की शाख़ें इतनी मज़बूत थीं कि उन से शाही असा बन सकते थे। वह बाक़ी पौदों से कहीं ज़्यादा ऊँची थी बल्कि उस की शाख़ें दूर दूर तक नज़र आती थीं।

[12] लेकिन आख़िरकार लोगों ने तैश में आ कर उसे उखाड़ कर फैंक दिया। मशरिक़ी लू ने उस का फल मुरझाने दिया। सब कुछ उतारा गया, लिहाज़ा वह सूख गया और उस का मज़बूत तना नज़र-ए-आतिश हुआ।

[13] अब बेल को रेगिस्तान में लगाया गया है, वहाँ जहाँ ख़ुश्क और प्यासी ज़मीन होती है।

[14] उस के तने की एक टहनी से आग ने निकल कर उस का फल भस्म कर दिया। अब कोई मज़बूत शाख़ नहीं रही जिस से शाही असा बन सके’।” दर्ज-ए-बाला गीत मातमी है और आह-ओ-ज़ारी करने के लिए इस्तेमाल हुआ है।

हिज़्क़ीएल — Chapters