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[1] उस वक़्त फ़रिश्तों का अज़ीम सरदार मीकाएल उठ खड़ा होगा, वह जो तेरी क़ौम की शफ़ाअत करता है। मुसीबत का ऐसा वक़्त होगा कि क़ौमों के पैदा होने से ले कर उस वक़्त तक नहीं हुआ होगा। लेकिन साथ साथ तेरी क़ौम को नजात मिलेगी। जिस का भी नाम अल्लाह की किताब में दर्ज है वह नजात पाएगा।

[2] तब ख़ाक में सोए हुए मुतअद्दिद लोग जाग उठेंगे, कुछ अबदी ज़िन्दगी पाने के लिए और कुछ अबदी रुस्वाई और घिन का निशाना बनने के लिए।

[3] जो समझदार हैं वह आसमान की आब-ओ-ताब की मानिन्द चमकेंगे, और जो बहुतों को रास्त राह पर लाए हैं वह हमेशा तक सितारों की तरह जगमगाएँगे।

[4] लेकिन तू, ऐ दान्याल, इन बातों को छुपाए रख! इस किताब पर आख़िरी वक़्त तक मुहर लगा दे! बहुत लोग इधर उधर घूमते फिरेंगे, और इल्म में इज़ाफ़ा होता जाएगा।”

[5] फिर मैं, दान्याल ने दरया के पास दो आदमियों को देखा। एक इस किनारे पर खड़ा था जबकि दूसरा दूसरे किनारे पर।

[6] कतान से मुलब्बस आदमी बहते हुए पानी के ऊपर था। किनारों पर खड़े आदमियों में से एक ने उस से पूछा, “इन हैरतअंगेज़ बातों की तक्मील तक मज़ीद कितनी देर लगेगी?”

[7] कतान से मुलब्बस आदमी ने दोनों हाथ आसमान की तरफ़ उठाए और अबद तक ज़िन्दा ख़ुदा की क़सम खा कर बोला, “पहले एक अर्सा, फिर दो अर्से, फिर आधा अर्सा गुज़रेगा। पहले मुक़द्दस क़ौम की ताक़त को पाश पाश करने का सिलसिला इख़तिताम पर पहुँचना है। इस के बाद ही यह तमाम बातें तक्मील तक पहुँचेंगी।”

[8] गो मैं ने उस की यह बात सुनी, लेकिन वह मेरी समझ में न आई। चुनाँचे मैं ने पूछा, “मेरे आक़ा, इन तमाम बातों का क्या अन्जाम होगा?”

[9] वह बोला, “ऐ दान्याल, अब चला जा! क्यूँकि इन बातों को आख़िरी वक़्त तक छुपाए रखना है। उस वक़्त तक इन पर मुहर लगी रहेगी।

[10] बहुतों को आज़मा कर पाक-साफ़ और ख़ालिस किया जाएगा। लेकिन बेदीन बेदीन ही रहेंगे। कोई भी बेदीन यह नहीं समझेगा, लेकिन समझदारों को समझ आएगी।

[11] जिस वक़्त से रोज़ाना की क़ुर्बानी का इन्तिज़ाम बन्द किया जाएगा और तबाही के मकरूह बुत को मक़्दिस में खड़ा किया जाएगा उस वक़्त से 1,290 दिन गुज़रेंगे।

[12] जो सब्र करके 1,335 दिनों के इख़तिताम तक क़ाइम रहे वह मुबारक है!

[13] जहाँ तक तेरा ताल्लुक़ है, आख़िरी वक़्त की तरफ़ बढ़ता चला जा! तू आराम करेगा और फिर दिनों के इख़तिताम पर जी उठ कर अपनी मीरास पाएगा।”

दान्याल — Chapters