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[1] ऐ इस्राईलियो, वह कलाम सुनो जो रब तुम्हारे ख़िलाफ़ फ़रमाता है, उस पूरी क़ौम के ख़िलाफ़ जिसे मैं मिस्र से निकाल लाया था।

[2] “दुनिया की तमाम क़ौमों में से मैं ने सिर्फ़ तुम ही को जान लिया, इस लिए मैं तुम ही को तुम्हारे तमाम गुनाहों की सज़ा दूँगा।”

[3] क्या दो अफ़राद मिल कर सफ़र कर सकते हैं अगर वह मुत्तफ़िक़ न हों?

[4] क्या शेरबबर दहाड़ता है अगर उसे शिकार न मिला हो? क्या जवान शेर अपनी मान्द में गरजता है अगर उस ने कुछ पकड़ा न हो?

[5] क्या परिन्दा फंदे में फंस जाता है अगर फंदे को लगाया न गया हो? या फंदा कुछ फंसा सकता है अगर शिकार न हो?

[6] जब शहर में नरसिंगा फूँका जाता है ताकि लोगों को किसी ख़तरे से आगाह करे तो क्या वह नहीं घबराते? जब आफ़त शहर पर आती है तो क्या रब की तरफ़ से नहीं होती?

[7] यक़ीनन जो भी मन्सूबा रब क़ादिर-ए-मुतलक़ बांधे उस पर अमल करने से पहले वह उसे अपने ख़ादिमों यानी नबियों पर ज़ाहिर करता है।

[8] शेरबबर दहाड़ उठा है तो कौन है जो डर न जाए? रब क़ादिर-ए-मुतलक़ बोल उठा है तो कौन है जो नबुव्वत न करे?

[9] अश्दूद और मिस्र के महलों को इत्तिला दो, “सामरिया के पहाड़ों पर जमा हो कर उस पर नज़र डालो जो कुछ शहर में हो रहा है। कितनी बड़ी हलचल मच गई है, कितना ज़ुल्म हो रहा है।”

[10] रब फ़रमाता है, “यह लोग सहीह काम करना जानते ही नहीं बल्कि ज़ालिम और तबाहकुन तरीक़ों से अपने महलों में ख़ज़ाने जमा करते हैं।”

[11] चुनाँचे रब क़ादिर-ए-मुतलक़ फ़रमाता है, “दुश्मन मुल्क को घेर कर तेरी क़िलाबन्दियों को ढा देगा और तेरे महलों को लूट लेगा।”

[12] रब फ़रमाता है, “अगर चरवाहा अपनी भेड़ को शेरबबर के मुँह से निकालने की कोशिश करे तो शायद दो पिंडलियाँ या कान का टुकड़ा बच जाए। सामरिया के इस्राईली भी इसी तरह ही बच जाएंगे, ख़्वाह वह इस वक़्त अपने शानदार सोफ़ों और ख़ूबसूरत गद्दियों पर आराम क्यूँ न करें।”

[13] रब क़ादिर-ए-मुतलक़ जो आसमानी लश्करों का ख़ुदा है फ़रमाता है, “सुनो, याक़ूब के घराने के ख़िलाफ़ गवाही दो!

[14] जिस दिन मैं इस्राईल को उस के गुनाहों की सज़ा दूँगा उस दिन मैं बैत-एल की क़ुर्बानगाहों को मिस्मार करूँगा। तब क़ुर्बानगाह के कोनों पर लगे सींग टूट कर ज़मीन पर गिर जाएंगे।

[15] मैं सर्दियों और गर्मियों के मौसम के लिए तामीर किए गए घरों को ढा दूँगा। हाथीदाँत से आरास्ता इमारतें ख़ाक में मिलाई जाएँगी, और जहाँ इस वक़्त मुतअद्दिद मकान नज़र आते हैं वहाँ कुछ नहीं रहेगा।” यह रब का फ़रमान है।

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