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[1] एक दिन इलीशा नबी ने नबियों के गुरोह में से एक को बुला कर कहा, “सफ़र के लिए कमरबस्ता हो कर रामात-जिलिआद के लिए रवाना हो जाएँ। ज़ैतून के तेल की यह कुप्पी अपने साथ ले जाएँ।

[2] वहाँ पहुँच कर याहू बिन यहूसफ़त बिन निम्सी को तलाश करें। जब उस से मुलाक़ात हो तो उसे उस के साथियों से अलग करके किसी अन्दरूनी कमरे में ले जाएँ।

[3] वहाँ कुप्पी ले कर याहू के सर पर तेल उंडेल दें और कहें, ‘रब फ़रमाता है कि मैं तुझे तेल से मसह करके इस्राईल का बादशाह बना देता हूँ।’ इस के बाद देर न करें बल्कि फ़ौरन दरवाज़े को खोल कर भाग जाएँ!”

[4] चुनाँचे जवान नबी रामात-जिलिआद के लिए रवाना हुआ।

[5] जब वहाँ पहुँचा तो फ़ौजी अफ़्सर मिल कर बैठे हुए थे। वह उन के क़रीब गया और बोला, “मेरे पास कमाँडर के लिए पैग़ाम है।” याहू ने सवाल किया, “हम में से किस के लिए?” नबी ने जवाब दिया, “आप ही के लिए।”

[6] याहू खड़ा हुआ और उस के साथ घर में गया। वहाँ नबी ने याहू के सर पर तेल उंडेल कर कहा, “रब इस्राईल का ख़ुदा फ़रमाता है, ‘मैं ने तुझे मसह करके अपनी क़ौम का बादशाह बना दिया है।

[7] तुझे अपने मालिक अख़ियब के पूरे ख़ानदान को हलाक करना है। यूँ मैं उन नबियों का इन्तिक़ाम लूँगा जो मेरी ख़िदमत करते हुए शहीद हो गए हैं। हाँ, मैं रब के उन तमाम ख़ादिमों का बदला लूँगा जिन्हें ईज़बिल ने क़त्ल किया है।

[8] अख़ियब का पूरा घराना तबाह हो जाएगा। मैं उस के ख़ानदान के हर मर्द को हलाक कर दूँगा, ख़्वाह वह बालिग़ हो या बच्चा।

[9] मेरा अख़ियब के ख़ानदान के साथ वही सुलूक होगा जो मैं ने यरुबिआम बिन नबात और बाशा बिन अख़ियाह के ख़ानदानों के साथ किया।

[10] जहाँ तक ईज़बिल का ताल्लुक़ है उसे दफ़नाया नहीं जाएगा बल्कि कुत्ते उसे यज़्रएल की ज़मीन पर खा जाएंगे’।” यह कह कर नबी दरवाज़ा खोल कर भाग गया।

[11] जब याहू निकल कर अपने साथी अफ़्सरों के पास वापस आया तो उन्हों ने पूछा, “क्या सब ख़ैरियत है? यह दीवाना आप से क्या चाहता था?” याहू बोला, “ख़ैर, आप तो इस क़िस्म के लोगों को जानते हैं कि किस तरह की गप्पें हाँकते हैं।”

[12] लेकिन उस के साथी इस जवाब से मुत्मइन न हुए, “झूट! सहीह बात बताएँ।” फिर याहू ने उन्हें खुल कर बात बताई, “आदमी ने कहा, ‘रब फ़रमाता है कि मैं ने तुझे मसह करके इस्राईल का बादशाह बना दिया है’।”

[13] यह सुन कर अफ़्सरों ने जल्दी जल्दी अपनी चादरों को उतार कर उस के सामने सीढ़ियों पर बिछा दिया। फिर वह नरसिंगा बजा बजा कर नारा लगाने लगे, “याहू बादशाह ज़िन्दाबाद!”

[14] याहू बिन यहूसफ़त बिन निम्सी फ़ौरन यूराम बादशाह को तख़्त से उतारने के मन्सूबे बांधने लगा। यूराम उस वक़्त पूरी इस्राईली फ़ौज समेत रामात-जिलिआद के क़रीब दमिश्क़ के बादशाह हज़ाएल से लड़ रहा था। लेकिन शहर का दिफ़ा करते करते

[15] बादशाह शाम के फ़ौजियों के हाथों ज़ख़्मी हो गया था और मैदान-ए-जंग को छोड़ कर यज़्रएल वापस आया था ताकि ज़ख़्म भर जाएँ। अब याहू ने अपने साथी अफ़्सरों से कहा, “अगर आप वाक़ई मेरे साथ हैं तो किसी को भी शहर से निकलने न दें, वर्ना ख़तरा है कि कोई यज़्रएल जा कर बादशाह को इत्तिला दे दे।”

[16] फिर वह रथ पर सवार हो कर यज़्रएल चला गया जहाँ यूराम आराम कर रहा था। उस वक़्त यहूदाह का बादशाह अख़ज़ियाह भी यूराम से मिलने के लिए यज़्रएल आया हुआ था।

[17] जब यज़्रएल के बुर्ज पर खड़े पहरेदार ने याहू के ग़ोल को शहर की तरफ़ आते हुए देखा तो उस ने बादशाह को इत्तिला दी। यूराम ने हुक्म दिया, “एक घुड़सवार को उन की तरफ़ भेज कर उन से मालूम करें कि सब ख़ैरियत है या नहीं।”

[18] घुड़सवार शहर से निकला और याहू के पास आ कर कहा, “बादशाह पूछते हैं कि क्या सब ख़ैरियत है?” याहू ने जवाब दिया, “इस से आप का क्या वास्ता? आएँ, मेरे पीछे हो लें।” बुर्ज पर के पहरेदार ने बादशाह को इत्तिला दी, “क़ासिद उन तक पहुँच गया है, लेकिन वह वापस नहीं आ रहा।”

[19] तब बादशाह ने एक और घुड़सवार को भेज दिया। याहू के पास पहुँच कर उस ने भी कहा, “बादशाह पूछते हैं कि क्या सब ख़ैरियत है?” याहू ने जवाब दिया, “इस से आप का क्या वास्ता? मेरे पीछे हो लें।”

[20] बुर्ज पर के पहरेदार ने यह देख कर बादशाह को इत्तिला दी, “हमारा क़ासिद उन तक पहुँच गया है, लेकिन यह भी वापस नहीं आ रहा। ऐसा लगता है कि उन का राहनुमा याहू बिन निम्सी है, क्यूँकि वह अपने रथ को दीवाने की तरह चला रहा है।”

[21] यूराम ने हुक्म दिया, “मेरे रथ को तय्यार करो!” फिर वह और यहूदाह का बादशाह अपने अपने रथ में सवार हो कर याहू से मिलने के लिए शहर से निकले। उन की मुलाक़ात उस बाग़ के पास हुई जो नबोत यज़्रएली से छीन लिया गया था।

[22] याहू को पहचान कर यूराम ने पूछा, “याहू, क्या सब ख़ैरियत है?” याहू बोला, “ख़ैरियत कैसे हो सकती है जब तेरी माँ ईज़बिल की बुतपरस्ती और जादूगरी हर तरफ़ फैली हुई है?”

[23] यूराम बादशाह चिल्ला उठा, “ऐ अख़ज़ियाह, ग़द्दारी!” और मुड़ कर भागने लगा।

[24] याहू ने फ़ौरन अपनी कमान खैंच कर तीर चलाया जो सीधा यूराम के कंधों के दरमियान यूँ लगा कि दिल में से गुज़र गया। बादशाह एक दम अपने रथ में गिर पड़ा।

[25] याहू ने अपने साथ वाले अफ़्सर बिद्क़र से कहा, “इस की लाश उठा कर उस बाग़ में फैंक दें जो नबोत यज़्रएली से छीन लिया गया था। क्यूँकि वह दिन याद करें जब हम दोनों अपने रथों को इस के बाप अख़ियब के पीछे चला रहे थे और रब ने अख़ियब के बारे में एलान किया,

[26] ‘यक़ीन जान कि कल नबोत और उस के बेटों का क़त्ल मुझ से छुपा न रहा। इस का मुआवज़ा मैं तुझे नबोत की इसी ज़मीन पर दूँगा।’ चुनाँचे अब यूराम को उठा कर उस ज़मीन पर फैंक दें ताकि रब की बात पूरी हो जाए।”

[27] जब यहूदाह के बादशाह अख़ज़ियाह ने यह देखा तो वह बैत-गान का रास्ता ले कर फ़रार हो गया। याहू उस का ताक़्क़ुब करते हुए चिल्लाया, “उसे भी मार दो!” इब्लीआम के क़रीब जहाँ रास्ता जूर की तरफ़ चढ़ता है अख़ज़ियाह अपने रथ में चलते चलते ज़ख़्मी हुआ। वह बच तो निकला लेकिन मजिद्दो पहुँच कर मर गया।

[28] उस के मुलाज़िम लाश को रथ पर रख कर यरूशलम लाए। वहाँ उसे यरूशलम के उस हिस्से में जो ‘दाऊद का शहर’ कहलाता है ख़ानदानी क़ब्र में दफ़नाया गया।

[29] अख़ज़ियाह यूराम बिन अख़ियब की हुकूमत के 11वें साल में यहूदाह का बादशाह बन गया था।

[30] इस के बाद याहू यज़्रएल चला गया। जब ईज़बिल को इत्तिला मिली तो उस ने अपनी आँखों में सुरमा लगा कर अपने बालों को ख़ूबसूरती से संवारा और फिर खिड़की से बाहर झाँकने लगी।

[31] जब याहू महल के गेट में दाख़िल हुआ तो ईज़बिल चिल्लाई, “ऐ ज़िम्री जिस ने अपने मालिक को क़त्ल कर दिया है, क्या सब ख़ैरियत है?”

[32] याहू ने ऊपर देख कर आवाज़ दी, “कौन मेरे साथ है, कौन?” दो या तीन ख़्वाजासराओं ने खिड़की से बाहर देख कर उस पर नज़र डाली

[33] तो याहू ने उन्हें हुक्म दिया, “उसे नीचे फैंक दो!” तब उन्हों ने मलिका को नीचे फैंक दिया। वह इतने ज़ोर से ज़मीन पर गिरी कि ख़ून के छींटे दीवार और घोड़ों पर पड़ गए। याहू और उस के लोगों ने अपने रथों को उस के ऊपर से गुज़रने दिया।

[34] फिर याहू महल में दाख़िल हुआ और खाया और पिया। इस के बाद उस ने हुक्म दिया, “कोई जाए और उस लानती औरत को दफ़न करे, क्यूँकि वह बादशाह की बेटी थी।”

[35] लेकिन जब मुलाज़िम उसे दफ़न करने के लिए बाहर निकले तो देखा कि सिर्फ़ उस की खोपड़ी, हाथ और पाँओ बाक़ी रह गए हैं।

[36] याहू के पास वापस जा कर उन्हों ने उसे आगाह किया। तब उस ने कहा, “अब सब कुछ पूरा हुआ है जो रब ने अपने ख़ादिम इल्यास तिश्बी की मारिफ़त फ़रमाया था, ‘यज़्रएल की ज़मीन पर कुत्ते ईज़बिल की लाश खा जाएंगे।

[37] उस की लाश यज़्रएल की ज़मीन पर गोबर की तरह पड़ी रहेगी ताकि कोई यक़ीन से न कह सके कि वह कहाँ है’।”

२-सलातीन — Chapters