Skip to content
Opens in a new window
Listen to this chapter • 4:04

[1] आप में यह जुरअत कैसे पैदा हुई कि जब किसी का किसी दूसरे ईमानदार के साथ तनाज़ा हो तो वह अपना झगड़ा बेदीनों के सामने ले जाता है न कि मुक़द्दसों के सामने?

[2] क्या आप नहीं जानते कि मुक़द्दसीन दुनिया की अदालत करेंगे? और अगर आप दुनिया की अदालत करेंगे तो क्या आप इस क़ाबिल नहीं कि छोटे मोटे झगड़ों का फ़ैसला कर सकें?

[3] क्या आप को मालूम नहीं कि हम फ़रिश्तों की अदालत करेंगे? तो फिर क्या हम रोज़मर्रा के मुआमलात को नहीं निपटा सकते?

[4] और इस क़िस्म के मुआमलात को फ़ैसल करने के लिए आप ऐसे लोगों को क्यूँ मुक़र्रर करते हैं जो जमाअत की निगाह में कोई हैसियत नहीं रखते?

[5] यह बात मैं आप को शर्म दिलाने के लिए कहता हूँ। क्या आप में एक भी सयाना शख़्स नहीं जो अपने भाइयों के माबैन फ़ैसला करने के क़ाबिल हो?

[6] लेकिन नहीं। भाई अपने ही भाई पर मुक़द्दमा चलाता है और वह भी ग़ैरईमानदारों के सामने।

[7] अव्वल तो आप से यह ग़लती हुई कि आप एक दूसरे से मुक़द्दमाबाज़ी करते हैं। अगर कोई आप से नाइन्साफ़ी कर रहा हो तो क्या बेहतर नहीं कि आप उसे ऐसा करने दें? और अगर कोई आप को ठग रहा हो तो क्या यह बेहतर नहीं कि आप उसे ठगने दें?

[8] इस के बरअक्स आप का यह हाल है कि आप ख़ुद ही नाइन्साफ़ी करते और ठगते हैं और वह भी अपने भाइयों को।

[9] क्या आप नहीं जानते कि नाइन्साफ़ अल्लाह की बादशाही मीरास में नहीं पाएँगे? फ़रेब न खाएँ! हरामकार, बुतपरस्त, ज़िनाकार, हमजिन्सपरस्त, लौंडेबाज़,

[10] चोर, लालची, शराबी, बदज़बान, लुटेरे, यह सब अल्लाह की बादशाही मीरास में नहीं पाएँगे।

[11] आप में से कुछ ऐसे थे भी। लेकिन आप को धोया गया, आप को मुक़द्दस किया गया, आप को ख़ुदावन्द ईसा मसीह के नाम और हमारे ख़ुदा के रूह से रास्तबाज़ बनाया गया है।

[12] मेरे लिए सब कुछ जाइज़ है, लेकिन सब कुछ मुफ़ीद नहीं। मेरे लिए सब कुछ जाइज़ तो है, लेकिन मैं किसी भी चीज़ को इजाज़त नहीं दूँगा कि मुझ पर हुकूमत करे।

[13] बेशक ख़ुराक पेट के लिए और पेट ख़ुराक के लिए है, मगर अल्लाह दोनों को नेस्त कर देगा। लेकिन हम इस से यह नतीजा नहीं निकाल सकते कि जिस्म ज़िनाकारी के लिए है। हरगिज़ नहीं! जिस्म ख़ुदावन्द के लिए है और ख़ुदावन्द जिस्म के लिए।

[14] अल्लाह ने अपनी क़ुदरत से ख़ुदावन्द ईसा को ज़िन्दा किया और इसी तरह वह हमें भी ज़िन्दा करेगा।

[15] क्या आप नहीं जानते कि आप के जिस्म मसीह के आज़ा हैं? तो क्या मैं मसीह के आज़ा को ले कर फ़ाहिशा के आज़ा बनाऊँ? हरगिज़ नहीं।

[16] क्या आप को मालूम नहीं कि जो फ़ाहिशा से लिपट जाता है वह उस के साथ एक तन हो जाता है? जैसे पाक नविश्तों में लिखा है, “वह दोनों एक हो जाते हैं।”

[17] इस के बरअक्स जो ख़ुदावन्द से लिपट जाता है वह उस के साथ एक रूह हो जाता है।

[18] ज़िनाकारी से भागें! इन्सान से सरज़द होने वाला हर गुनाह उस के जिस्म से बाहर होता है सिवाए ज़िना के। ज़िनाकार तो अपने ही जिस्म का गुनाह करता है।

[19] क्या आप नहीं जानते कि आप का बदन रूह-उल-क़ुद्स का घर है जो आप के अन्दर सुकूनत करता है और जो आप को अल्लाह की तरफ़ से मिला है? आप अपने मालिक नहीं हैं

[20] क्यूँकि आप को क़ीमत अदा करके ख़रीदा गया है। अब अपने बदन से अल्लाह को जलाल दें।

१-कुरिन्थियों — Chapters