[1] हम, पौलुस, जे परमेश्वरक दास आ यीशु मसीहक एक मसीह-दूत छी, ई पत्र लिखि रहल छी। हमरा एहि लेल पठाओल गेल जे परमेश्वरक चुनल लोक सभ केँ सही बात पर विश्वास करऽ मे मजगूत करी आ सत्यक ओ ज्ञान सिखाबी जे भक्तिक अनुसार आचरण-व्यवहार उत्पन्न करैत अछि।
[2] ओ विश्वास आ ज्ञान अनन्त जीवन पयबाक आशाक आधार अछि। परमेश्वर, जे कहियो झूठ नहि बजैत छथि, से संसारक सृष्टि सँ पहिनहि ई अनन्त जीवन देबाक वचन देने छथि,
[3] और आब निर्धारित समय पर ओ अपन वचन सुसमाचारक प्रचार द्वारा प्रगट कऽ देलनि। ई प्रचारक काज अपना सभक उद्धारकर्ता परमेश्वरक आज्ञा द्वारा हमरा सौंपि देल गेल अछि।
[4] हम ई पत्र हमरा संग एके विश्वास मे सहभागिताक दृष्टि सँ अपन असली पुत्र तीतुस केँ लिखि रहल छी। पिता परमेश्वर आ अपना सभक उद्धारकर्ता मसीह यीशु अहाँ पर कृपा करथि आ अहाँ केँ शान्ति देथि।
[5] हम अहाँ केँ क्रेत द्वीप मे एहि लेल छोड़ि अयलहुँ जे ओतुक्का बाँकी बात सभ केँ सुधारू आ जहिना हम अहाँ केँ सिखौने छलहुँ तहिना प्रत्येक नगर मे मण्डलीक देख-रेख कयनिहार सभ केँ नियुक्त करू।
[6] ई आवश्यक अछि जे मण्डलीक देख-रेख कयनिहार निष्कलंक होथि, हुनका एकेटा स्त्री होनि, हुनकर बाल-बच्चा प्रभु पर विश्वास करैत होअय आ ओकरा सभ पर बदमास वा बेकहल होयबाक आरोप नहि लगाओल जा सकय।
[7] किएक तँ जखन परमेश्वरक काज हुनका हाथ मे सौंपल गेल अछि तँ मण्डलीक जिम्मेवार केँ निष्कलंक होयब आवश्यक अछि। ओ जिद्दी, क्रोधी, शराबी, मारा-मारी कयनिहार आ अनुचित लाभ कमयबाक इच्छुक नहि होथि।
[8] बल्कि ओ अतिथि-सत्कार कयनिहार, नीक बात सँ प्रेम कयनिहार, विचारवान, न्यायी, पवित्र चरित्रक आ संयमी होथि।
[9] ओ विश्वसनीय वचनक ताहि रूप पर दृढ़ रहथि जाहि रूप मे ओ वचन हुनका सिखाओल गेलनि, जाहि सँ ओ सही सिद्धान्तक अनुसार लोक केँ शिक्षा दऽ सकथि आ तकर विरोधी सभ केँ निरुत्तर कऽ सकथि।
[10] कारण, बहुत एहन लोक अछि जे बेकहल, बक-बक कयनिहार आ धोखेबाज अछि, विशेष रूप सँ खतना प्रथाक कट्टर समर्थक यहूदी सभ मे।
[11] एकरा सभक मुँह बन्द कयनाइ आवश्यक अछि, किएक तँ एहन लोक नीच लक्ष्य सँ अपने लाभक लेल अनुचित बात सभ सिखा कऽ घरक-घर बिगाड़ि रहल अछि।
[12] क्रेत वासी सभक अपनो एक भविष्यवक्ता कहने छथि जे, “क्रेत वासी सभ हरदम झूठ बजैत अछि, मरखाह जानबर आ आलसी पेटाह अछि।”
[13] ओकरा सभक विषय मे कहल ई गवाही सत्य अछि। एहि लेल अहाँ ओकरा सभ केँ कड़ा चेतावनी दिऔक जाहि सँ ओकरा सभक विश्वास सही शिक्षा पर आधारित भऽ जाइक,
[14] आ ओ सभ यहूदी सभक मनगढ़न्त कथा-पिहानी पर और सत्य केँ अस्वीकार करऽ वला लोक सभक विभिन्न नियम सभ पर ध्यान नहि दिअय।
[15] शुद्ध मोनक लोकक लेल सभ वस्तु शुद्ध अछि मुदा जे सभ भ्रष्ट भेल अछि आ प्रभु पर विश्वास नहि करैत अछि, तकरा सभक लेल कोनो वस्तु शुद्ध नहि, कारण ओकरा सभक मोन आ विवेक दूनू दुषित भऽ गेल छैक।
[16] ओ सभ अपना केँ परमेश्वर केँ जननिहार तँ कहैत अछि, मुदा अपना व्यवहार द्वारा हुनका अस्वीकार करैत अछि। ओ सभ घृणित अछि, आज्ञा उल्लंघन कयनिहार अछि और कोनो प्रकारक नीक काज करबाक जोगरक नहि अछि।