Skip to content
Opens in a new window
Listen to this chapter • 9:23

[1] जखन अपुल्‍लोस कोरिन्‍थ नगर मे छलाह, तखन पौलुस समुद्र सँ दूर वला इलाका सभ दऽ कऽ इफिसुस नगर अयलाह, जतऽ हुनका किछु शिष्‍य सभ भेटलनि।

[2] ओ ओकरा सभ केँ पुछलथिन, “अहाँ सभ जखन विश्‍वास कयलहुँ तँ की पवित्र आत्‍मा अहाँ सभ केँ प्राप्‍त भेलाह?” ओ सभ उत्तर देलकनि, “नहि। हम सभ तँ से सुननहु नहि छी जे पवित्र आत्‍मा होइत छथि।”

[3] पौलुस पुछलथिन, “तँ कोन बात विश्‍वास कऽ कऽ बपतिस्‍मा लेलहुँ?” ओ सभ जबाब देलकनि, “जे बात यूहन्‍ना सिखबैत छलाह।”

[4] एहि पर पौलुस ओकरा सभ केँ बुझौलथिन, “यूहन्‍नाक बपतिस्‍मा ई देखयबाक लेल छल जे, पापक लेल पश्‍चात्ताप कऽ कऽ हृदय-परिवर्तन कयलहुँ, मुदा यूहन्‍ना लोक सभ केँ इहो सिखबैत छलाह जे, जे हमरा बाद मे आबि रहल छथि, अर्थात् यीशु, तिनका पर विश्‍वास करू।”

[5] ओ सभ ई बात सुनि यीशुक नाम मे बपतिस्‍मा लेलक।

[6] पौलुस ओकरा सभ पर हाथ रखलनि तँ पवित्र आत्‍मा ओकरा सभ मे अयलाह। ओ सभ अनजान भाषा मे बाजऽ लागल आ प्रभु सँ पाओल सम्‍बाद सभ सुनाबऽ लागल।

[7] ओ सभ करीब बारह गोटे छल।

[8] तीन मास धरि पौलुस ओतुक्‍का सभाघर मे जा कऽ निर्भयतापूर्बक लोक सभ सँ बात-चीत आ तर्क-वितर्क कऽ कऽ ओकरा सभ केँ परमेश्‍वरक राज्‍यक विषय मे बुझबैत रहलाह।

[9] मुदा जखन ओकरा सभ मे सँ किछु लोक जिद्दिया कऽ शुभ समाचार नहि मानलक आ सौंसे सभाक सामने मे प्रभुक बाटक निन्‍दा करऽ लागल, तँ पौलुस ओकरा सभ केँ छोड़ि देलनि आ शिष्‍य सभ केँ अपना संग लऽ कऽ चल अयलाह। आब ओ सभ तुरन्‍नुस नामक व्‍यक्‍तिक भवन मे जा कऽ प्रति दिन तर्क-वितर्क करऽ लगलाह।

[10] ई क्रम दू वर्ष धरि चलल। फलस्‍वरूप आसिया प्रदेश मे रहऽ वला सभ लोक, यहूदी आ यूनानी दूनू, प्रभुक वचन सुनऽ पौलक।

[11] परमेश्‍वर पौलुसक माध्‍यम सँ बहुत अद्‌भुत चमत्‍कार करैत छलाह।

[12] लोक सभ रुमाल आ अंगपोछा हुनका देह मे छुआ कऽ अस्‍वस्‍थ लोक सभ लग लऽ जाइत छल, तँ ओ सभ अपना बिमारी सँ मुक्‍त भऽ जाइत छल आ दुष्‍टात्‍मा सभ ओकरा सभ मे सँ निकलि जाइत छलैक।

[13] एहि पर एम्‍हर-ओम्‍हर घुम-फिर करऽ वला किछु यहूदी ओझा-गुनी दुष्‍टात्‍मा सँ ग्रसित लोक सभ पर यीशुक नामक प्रयोग करबाक कोशिश कयलक। ओ सभ दुष्‍टात्‍मा सभ केँ एना कहैत छलैक, “यीशुक नाम सँ, जिनकर प्रचार पौलुस करैत छथि, हम तोरा आज्ञा दैत छिऔ—तोँ एकरा मे सँ निकल!”

[14] एहि ओझा-गुनी सभ मे यहूदी सभक एक मुख्‍यपुरोहित, जिनकर नाम स्‍कीवा छलनि, तिनकर सातटा बेटा सेहो छल।

[15] एक बेर दुष्‍टात्‍मा ओकरा सभ केँ उत्तर देलकैक, “यीशु केँ हम जनैत छियनि, आ पौलुस केँ चिन्‍हैत छियनि, लेकिन तोँ सभ के छेँ?”

[16] तखन ओ दुष्‍टात्‍मा लागल आदमी ओकरा सभ पर झपटि कऽ सभ केँ पछाड़ि देलकैक, आ ततेक मारलकैक-पिटलकैक, जे ओ सभ नंगटे आ घायल भऽ कऽ ओहि घर सँ भागि गेल।

[17] एहि घटनाक बारे मे जखन इफिसुसक निवासी, यहूदी आ यूनानी सभ सुनलक, तँ ओकरा सभ केँ बड़का डर सन्‍हिया गेलैक, आ प्रभु यीशुक प्रति आदर बहुत बढ़ि गेलैक।

[18] विश्‍वासिओ सभ मे सँ बहुत गोटे आबि कऽ अपन गलत काज सभ खुलि कऽ मानि लेलक,

[19] आ बहुत जादू-टोना करऽ वला सभ अपन पोथी सभ जमा कऽ कऽ सभक सामने मे जरा देलक। जखन ओहि सभ पोथीक मूल्‍यांकन कयल गेल तँ ओ पचास हजार चानीक सिक्‍काक छल।

[20] एहि तरहेँ प्रभुक वचन आरो पसरैत गेल, और शक्‍ति आ प्रभाव मे बढ़ैत गेल।

[21] एहि घटना सभक बाद पौलुस अपना मोन मे मकिदुनिया और अखाया प्रदेश दऽ कऽ यरूशलेम जयबाक निर्णय कऽ लेलनि। ओ कहलनि, “ओतऽ पहुँचलाक बाद हमरा रोम सेहो गेनाइ आवश्‍यक अछि।”

[22] तखन ओ अपन दूटा सहकर्मी तिमुथियुस आ इरास्‍तुस केँ आगाँ मकिदुनिया पठा कऽ अपने किछु दिन आओर आसिया प्रदेश मे रहलाह।

[23] एही समय मे प्रभुक “बाट” केँ लऽ कऽ इफिसुस शहर मे बड़का खलबली मचि गेल।

[24] देमेत्रियुस नामक एक सोनार, जे अरतिमिस देवीक मन्‍दिरक चानीक मुरुत बनबैत छल आ कारीगर सभ केँ सेहो बहुते काज दिअबैत छल,

[25] से एक दिन अपन कारीगर सभ आ एहि व्‍यवसाय सँ सम्‍बन्‍धित आरो कारीगर सभ केँ सेहो जमा कऽ कऽ कहलकैक, “यौ भाइ लोकनि! अहाँ सभ केँ बुझले अछि जे अपना सभक सभ धन-सम्‍पत्ति एही व्‍यवसाय सँ अछि।

[26] और इहो देखि आ सुनि रहल छी जे ई पौलुस कोना इफिसुसो मे आ करीब-करीब सौंसे आसिया प्रदेश मे बहुतो लोक केँ समझा-बुझा कऽ बहका देने छैक जे, हाथक बनाओल देवता तँ देवता अछिए नहि।

[27] एहि सँ एतबे बातक खतरा नहि, जे अपना सभक व्‍यवसायक प्रतिष्‍ठा जाइत रहत, बल्‍कि एकरो जे महान् देवी अरतिमिसक मन्‍दिर तुच्‍छ बुझल जयतनि, और ई देवी जिनकर पूजा आसिया प्रदेश मे आ सौंसे संसार मे सेहो कयल जाइत छनि, तिनकर ईश्‍वरीय गौरव समाप्‍त भऽ जयतनि।”

[28] ई सुनि ओकरा सभक क्रोध भड़कि उठल और ओ सभ जोर-जोर सँ नारा लगाबऽ लागल जे, “इफिसी सभक अरतिमिस देवी महान्‌ छथि!”

[29] आब सौंसे शहर मे हुल्‍लड़ि मचि गेल। लोक सभ गयुस और अरिस्‍तर्खुस, जे मकिदुनिया प्रदेशक छलाह आ पौलुसक संग यात्रा कऽ रहल छलाह, तिनका सभ केँ पकड़ि लेलकनि आ सभ केओ एक जुट भऽ कऽ खेलक मैदान दिस दौड़ि पड़ल।

[30] पौलुस भीड़क समक्ष जा कऽ लोक सभ केँ किछु कहऽ चाहैत छलाह, मुदा आरो शिष्‍य सभ हुनका ओतऽ नहि जाय देलथिन।

[31] आसियाक किछु उच्‍चाधिकारी सभ, जे पौलुसक मित्र छलनि, सेहो हुनका खबरि पठा कऽ आग्रह कयलथिन जे ओ मैदान मे जयबाक कोशिश नहि करथि।

[32] एम्‍हर मैदान मे लोक सभक बीच ततेक गड़बड़ी छल जे ओ सभ हल्‍ला कऽ कऽ केओ किछु कहैत छल, तँ केओ किछु। विशेष लोक इहो नहि जनैत छल जे एतऽ आयल छी किएक।

[33] तखन यहूदी सभ सिकन्‍दर केँ ठेलि-ठालि कऽ प्रवक्‍ताक रूप मे सभाक आगाँ ठाढ़ कऽ देलकनि, और भीड़ मे सँ किछु लोक हुनका निर्देश देबऽ लगलनि। ओ भीड़ केँ चुप रहबाक लेल हाथ सँ संकेत कऽ कऽ लोक केँ बुझाबऽ लगलाह,

[34] मुदा लोक सभ जखन बुझलक जे ई यहूदी अछि तँ करीब दू घण्‍टा धरि एक स्‍वर मे नारा लगबैत रहल जे, “इफिसी सभक अरतिमिस देवी महान्‌ छथि!”

[35] अन्‍त मे शहरक प्रधानजी भीड़ केँ शान्‍त कयलनि आ कहलथिन, “यौ इफिसुस-निवासी सभ! की संसारक प्रत्‍येक मनुष्‍य ई नहि जनैत अछि जे इफिसुस शहर महान् देवी अरतिमिसक मन्‍दिर आ आकाश सँ खसल हुनकर मुरुतक रक्षक अछि?

[36] ई बात जखन निर्विवाद अछि तँ अहाँ सभ केँ शान्‍त रहबाक चाही आ बिनु सोचने-विचारने किछु नहि करबाक चाही।

[37] कारण, अहाँ सभ तँ एहन व्‍यक्‍ति सभ केँ पकड़ि कऽ अनने छी जे ने तँ मन्‍दिर केँ लुटने अछि आ ने अपना सभक देवीक अपमान कयने अछि।

[38] तेँ जँ देमेत्रियुस आ हुनकर संगी कारीगर सभ केँ ककरो सँ सिकायत छनि तँ कचहरी खुजल अछि आ न्‍यायाधीश लोकनि सेहो छथि। ओ सभ अपन अभियोग कचहरी मे पेश करथु।

[39] और जँ अहाँ सभ कोनो दोसर प्रश्‍न उठाबऽ चाहैत होइ तँ तकर निर्णय नियमित नागरिक-सभा मे कयल जायत।

[40] एखन हमरा डर अछि जे अजुका घटनाक कारणेँ कतौ अपना सभ पर दंगाक आरोप ने लगाओल जाय, कारण ई हुल्‍लड़ि बिनु कारणेँ छल, आ एकरा बारे मे अपना सभ कोनो उत्तर नहि दऽ सकब।”

[41] एतबा कहि ओ सभा केँ समाप्‍त कऽ देलनि।

मसीह-दूत सभक काज — Chapters