Skip to content
Opens in a new window
Listen to this chapter • 7:50

[1] तेँ, यौ भाइ लोकनि, हम चाहैत छी जे अहाँ सभ अपना सभक प्राचीन समयक पुरखा लोकनिक बारे मे बुझी जे, जे सभ मूसाक संग मिस्र देश सँ निकललाह ओ सभ गोटे ओहि मेघक छाया मे चललाह जे रस्‍ता देखबैत संग-संग चलैत छलनि, आ ओ सभ केओ लाल सागरक बीच बाटे पार भेलाह।

[2] एहि तरहेँ बुझल जा सकैत अछि जे ओ सभ केओ ओहि मेघक छाया मे चलि कऽ आ मूसाक पाछाँ समुद्र मे जा कऽ एहि रूप मे “बपतिस्‍मा” स्‍वीकार करैत मूसा मे सहभागी बनलाह।

[3] सभ केओ एके प्रकारक आत्‍मिक भोजन कयलनि,

[4] आ एके प्रकारक आत्‍मिक जल पिलनि, किएक तँ ओ सभ ओहि आत्‍मिक चट्टान सँ बहऽ वला जल पिबैत छलाह जे हुनका सभक संग-संग चलैत छलनि, और ओ चट्टान छलाह मसीह।

[5] ई सभ बात होइतो हुनका सभ मे सँ अधिकांश लोक सँ परमेश्‍वर अप्रसन्‍न भेलाह और ओ सभ निर्जन क्षेत्र मे नष्‍ट भऽ गेल।

[6] ई घटना सभ अपना सभक लेल उदाहरणक रूप मे चेतावनी भेल जाहि सँ अपना सभ हुनका सभ जकाँ अधलाह बात सभक लालसा नहि करी।

[7] हुनका सभ मे सँ किछु लोक जकाँ अहाँ सभ मूर्तिक पूजा कयनिहार नहि बनू, जिनका सभक विषय मे धर्मशास्‍त्र मे लिखल अछि जे, “लोक सभ खयबाक-पिबाक लेल बैसल आ मौज-मजा करबाक लेल उठल।”

[8] अपना सभ अनैतिक शारीरिक सम्‍बन्‍ध नहि राखी, जेना कि हुनका सभ मे सँ किछु लोक कयलनि आ एके दिन मे तेइस हजार मरि गेलाह।

[9] अपना सभ प्रभुक परीक्षा नहि करियनि, जेना कि हुनका सभ मे सँ किछु लोक कयलनि आ साँप सभक कटनाइ सँ मारल गेलाह।

[10] अहाँ सभ कुड़बुड़ाउ नहि, जेना कि हुनका सभ मे सँ किछु लोक कयलनि आ विनाशक दूत द्वारा मारल गेलाह।

[11] ई सभ घटना उदाहरणक लेल हुनका सभ पर बितलनि, आ अपना सभ केँ चेतावनी देबाक लेल लिखल गेल अछि जे सभ संसारक अन्‍त होमऽ-होमऽ वला समय मे जीबि रहल छी।

[12] तेँ जे केओ अपना केँ मजगूत बुझैत अछि से सावधान रहओ जे कहीं खसि ने पड़य।

[13] अहाँ सभ कहियो कोनो एहन परीक्षा मे नहि पड़लहुँ जे मनुष्‍य सभ केँ नहि होइत रहैत अछि। परमेश्‍वर विश्‍वासयोग्‍य छथि। ओ अहाँ सभ केँ एहन परीक्षा मे नहि पड़ऽ देताह जे अहाँ सभक सहनशक्‍ति सँ बाहर होअय। ओ परीक्षाक समय मे तकरा सहबाक साहस दैत अहाँ सभ केँ पार कऽ निकलबाक उपाय सेहो उपलब्‍ध करौताह।

[14] तेँ, यौ हमर प्रिय भाइ लोकनि, अहाँ सभ मूर्तिक पूजा कयनाइ सँ दूर रहू।

[15] हम अहाँ सभ केँ समझदार बुझि ई बात कहि रहल छी। हम जे कहैत छी तकर अहाँ सभ स्‍वयं जाँच करू जे ओ सही अछि वा नहि।

[16] प्रभु-भोजक ओ आशिषक बाटी, जकरा लेल अपना सभ प्रभु केँ धन्‍यवाद दैत छी, की ताहि मे सँ पिबैत अपना सभ मसीहक बहाओल खून मे सहभागी नहि छी? आ ओ रोटी, जकरा अपना सभ तोड़ैत छी, की ताहि मे सँ खा कऽ अपना सभ मसीहक देह मे सहभागी नहि छी?

[17] रोटी एकेटा अछि, एहि कारणेँ अपना सभ अनेक होइतो एक देह छी, किएक तँ अपना सभ ओहि एकेटा रोटी मे सँ खाइत छी।

[18] इस्राएली समाजक बारे मे सोचू—की बलि-भोज खयनिहार लोक ओहि परमेश्‍वरक सेवा मे सहभागी नहि अछि जिनकर वेदी पर बलि चढ़ाओल गेल अछि?

[19] तखन हम कहि की रहल छी? की ई जे मुरुत पर चढ़ाओल वस्‍तुक कोनो विशेषता अछि? वा की ई जे मुरुतक कोनो महत्‍व अछि?

[20] नहि! हमर कहबाक अर्थ ई अछि जे, जे बलि मुरुत पर चढ़ाओल जाइत अछि से परमेश्‍वर केँ नहि, बल्‍कि दुष्‍टात्‍मा सभ केँ चढ़ाओल जाइत अछि, आ हम नहि चाहैत छी जे अहाँ सभ दुष्‍टात्‍मा सभक सहभागी बनू।

[21] अहाँ सभ प्रभुक बाटी आ दुष्‍टात्‍मा सभक बाटी, दूनू मे सँ नहि पिबि सकैत छी। अहाँ सभ प्रभुक भोज आ दुष्‍टात्‍मा सभक भोज, दूनू मे सहभागी नहि बनि सकैत छी।

[22] की अपना सभ प्रभुक मोन मे डाह उत्‍पन्‍न कराबऽ चाहैत छी? की अपना सभ हुनका सँ शक्‍तिशाली छी?

[23] “सभ किछु करबाक स्‍वतन्‍त्रता अछि”—मुदा सभ किछु हितकर नहि अछि। “सभ किछु करबाक स्‍वतन्‍त्रता अछि”—मुदा सभ किछु लाभदायक नहि अछि।

[24] सभ केँ अपन नहि, बल्‍कि दोसर लोकक हितक ध्‍यान रखबाक चाही।

[25] बजार मे जे माँसु बिकाइत अछि तकरा अहाँ निश्‍चिन्‍ततापूर्बक खा सकैत छी। ओ माँसु चढ़ाओल अछि वा नहि तकर पूछ-ताछ नहि करऽ लागू,

[26] किएक तँ धर्मशास्‍त्र मे लिखल अछि जे “पृथ्‍वी आ ओहि परक जे किछु अछि से सभ प्रभुक छनि।”

[27] जँ अविश्‍वासी सभ मे सँ केओ अहाँ केँ निमन्‍त्रण दय आ अहाँ जाय चाही तँ जाउ आ ओतऽ जे किछु अहाँ केँ परसल जाइत अछि तकरा निश्‍चिन्‍ततापूर्बक बिनु कोनो प्रश्‍न कयने खाउ।

[28] मुदा जँ केओ कहय जे, “ओ प्रसाद अछि,” तँ कहनिहारक हितक लेल आ जाहि सँ विवेक केँ हानि नहि पहुँचय ओ वस्‍तु नहि खाउ।

[29] हमर कहबाक अर्थ अहाँक विवेक सँ नहि, बल्‍कि ओहि दोसर आदमीक विवेक सँ अछि। किएक तँ हमर स्‍वतन्‍त्रता दोसराक विवेकक अनुसार किएक दोषी ठहरय?

[30] जँ हम धन्‍यवाद दऽ कऽ भोजन करैत छी तँ जाहि वस्‍तुक लेल हम परमेश्‍वर केँ धन्‍यवाद देने छी ताहि सँ हमर निन्‍दा किएक होअय?

[31] अहाँ सभ खाइ वा पिबी वा जे किछु करी, सभ किछु एहि लेल करू जाहि सँ परमेश्‍वरक महिमा प्रगट होनि।

[32] ककरो ठेस लगबाक कारण नहि बनू, ने यहूदी सभक लेल, ने आन जातिक लेल आ ने परमेश्‍वरक मण्‍डलीक लेल।

[33] तहिना हमहूँ अपना हितक लेल नहि, बल्‍कि दोसर लोक सभक हित केँ ध्‍यान मे राखि कऽ सभ बात मे सभ लोक केँ प्रसन्‍न करबाक प्रयत्‍न करैत छी जाहि सँ ओ सभ उद्धार पाबि सकय।

कोरिन्‍थ नगरक मण्‍डली केँ पौलुसक पहिल पत्र — Chapters