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[1] हे माईलोगन म परम सुन्दरी, तोर मयारू ह कहां चल दीस? तोर मयारू ह कते अंग चल दीस, बता कि हमन घलो तोर संग ओला खोजन?

[2] मोर मयारू ह खाल्हे अपन बारी कोति गे हवय जिहां मसाला के पऊधामन के क्यारी हवय, ओह बारी म भेड़-बकरी चराय बर अऊ कुमुदिनी फूल बटोरे बर गे हवय।

[3] मेंह अपन मयारू के अंव अऊ मोर मयारू ह मोर अय; ओह भेड़-बकरी ला कुमुदिनी फूलमन के बीच म चराथे।

[4] हे मोर मयारू, तें तिरसा के सहीं सुघर, यरूसलेम के सहीं मनभावन, अऊ धजा फहरावत सेना सहीं सानदार हस।

[5] अपन नजर ला मोर कोति ले हटा ले; काबरकि ओमन मोला अभिभूत कर देथें। तोर चुंदी ह गिलाद पहाड़ ले उतरत छेरीमन के बरदी सहीं अय।

[6] तोर दांतमन नहा-खोरके ऊपर आवत भेड़मन के बरदी सहीं अंय, जेमा ले हर एक के जुड़वां हवय, अऊ ओमा के कोनो नइं गंवाय हवय।

[7] तोर घूंघट के भीतर तोर कनपटी ह अनार के आधा फर के सहीं अय।

[8] उहां साठ झन रानी, अऊ अस्सी झन रखैल, अऊ अब्बड़ अकन कुंवारी नोनीमन हो सकथें;

[9] पर मोर पंड़की, मोर सिद्ध जन ह तो अनोखा अय, ओह तो अपन दाई के एकलऊती बेटी अय, अऊ अपन जनम देवइया दाई के दुलारी अय। जवान माईलोगनमन ओला देखिन अऊ ओला धइन कहिन; रानीमन अऊ रखैलमन ओकर बड़ई करिन।

[10] येह कोन ए, जेकर सोभा बिहान पाय के सोभा सहीं हवय, चंदा के सहीं साफ-सुघर, सूरज के सहीं चमकीला, अऊ धजा धरे सेनामन सहीं सोभायमान हवय?

[11] मेंह अखरोट के बारी म गेंव कि घाटी म नवां बढ़त रूख-रई ला देखंव, अऊ देखंव कि अंगूर के नारमन म पीका आवत हे कि नइं या अनार के रूख म फूल फूलत हे कि नइं।

[12] एकर पहिली कि में ये बात ला समझतेंव, मोर मन ह मोला मोर मनखेमन के राजसी रथमन म लगा दीस।

[13] लहुंट आ, लहुंट आ, हे सुलाम के माईलोगन; लहुंट आ, लहुंट आ, कि हमन तोला एकटक देखन! दू ठन दलमन के नाचा ला देखे सहीं, तुमन सुलाम के माईलोगन ला एकटक काबर देखहू?

उत्तम गीत — Chapters