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[1] यीसू ह यरीहो सहर म ले होके जावत रिहिस।

[2] उहां जक्कई नांव के एक मनखे रहय। ओह लगान लेवइयामन के मुखिया रहय अऊ धनी मनखे रहय।

[3] ओह ये देखे चाहत रहय कि यीसू ह कोन ए, पर बुटरा होय के कारन भीड़ के मारे ओह यीसू ला नइं देखे सकत रिहिस।

[4] एकरसेति ओह भीड़ के आघू दऊड़िस अऊ यीसू ला देखे बर एक ठन डूमर रूख म चघ गीस, काबरकि यीसू ह ओही डहार म आवत रहय।

[5] जब यीसू ह ओ जगह म हबरिस, त ओह ऊपर देखिस अऊ जक्कई ला कहिस, “हे जक्कई, तुरते खाल्हे उतर आ काबरकि आज मोला तोर घर म रूकना जरूरी ए।”

[6] ओह तुरते खाल्हे उतरिस अऊ खुस होके यीसू ला अपन घर ले गीस।

[7] येला देखके जम्मो मनखेमन कुड़कुड़ाय लगिन अऊ कहिन, “यीसू ह एक पापी मनखे के घर म पहुना होय बर गे हवय।”

[8] पर जक्कई ह ठाढ़ होईस अऊ परभू ला कहिस, “हे परभू, अब मेंह अपन आधा संपत्ति गरीबमन ला देवत हवंव, अऊ यदि मेंह काकरो ले कुछू ठगके ले लेय हवंव, त मेंह ओकर चार गुना लहुंटाहूं।”

[9] यीसू ह ओला कहिस, “आज परमेसर ह ये मनखे अऊ एकर परिवार ला उद्धार दे हवय, काबरकि ये मनखे ह घलो अब्राहम के एक संतान ए।

[10] मनखे के बेटा ह एकर सहीं गंवायमन ला खोजे बर अऊ ओमन के उद्धार करे बर आय हवय।”

[11] जब मनखेमन ये बात ला सुनत रहंय, तब यीसू ह ओमन ला एक पटंतर कहिस, काबरकि ओह यरूसलेम सहर के लकठा म हबर गे रिहिस अऊ मनखेमन सोचत रहंय कि परमेसर के राज ह तुरते सुरू होवइया हवय।

[12] एकरसेति ओह कहिस, “एक ऊंच कुल के मनखे ह एक बहुंत दूरिहा देस ला गीस कि ओह उहां राजपद पावय अऊ फेर लहुंटके आवय।

[13] जाय के पहिली, ओह अपन दस झन सेवक ला बलाईस अऊ ओमन ला दस ठन सोन के सिक्का देके कहिस, ‘मोर वापिस लहुंटत तक ये पईसा ले बेपार करत रहव।’

[14] “पर ओ देस के मनखेमन ओला बिलकुल ही पसंद नइं करत रिहिन, एकरसेति ओमन कुछू झन ला ओकर पाछू ये कहे बर पठोईन, ‘हमन नइं चाहत हवन कि ये मनखे ह हमर राजा बनय।’

[15] “तभो ले, ओह राजा बनाय गीस अऊ फेर घर लहुंटिस। तब ओह जऊन सेवकमन ला पईसा दे रिहिस, ओमन ला बलाईस अऊ ये जाने चाहिस कि ओमन कतेक कमाय हवंय।

[16] “पहिली सेवक ह आईस अऊ कहिस, ‘मालिक, तोर दिये सोन के सिक्का ले मेंह दस ठन अऊ सोन के सिक्का कमाय हवंव।’

[17] “ओकर मालिक ह कहिस, ‘बहुंत बने करय। तेंह बने सेवक अस, काबरकि तेंह थोरकन चीज म ईमानदार रहय, मेंह तोला दस ठन सहर के अधिकारी बनावत हंव।’

[18] “दूसरा सेवक ह आईस अऊ कहिस, ‘मालिक, तोर दिये सिक्का ले मेंह पांच ठन अऊ सोन के सिक्का कमाय हवंव।’

[19] “ओकर मालिक ह कहिस, ‘मेंह तोला पांच ठन सहर के अधिकारी बनावत हंव।’

[20] “तब एक आने सेवक आईस अऊ कहिस, ‘मालिक, ये हवय तोर सोन के सिक्का, मेंह येला एक ठन कपड़ा के टुकड़ा म छुपाके रखे रहेंव।

[21] मेंह तोर ले डरत रहेंव, काबरकि तेंह एक कठोर मनखे अस। तेंह ओला ले लेथस, जऊन ह तोर नो हय, अऊ जऊन ला तेंह नइं बोय रहस, ओला लूथस।’

[22] “ओकर मालिक ह कहिस, ‘हे दुस्ट सेवक! मेंह तोर नियाय तोर कहे बचन के मुताबिक करहूं। तेंह जानत रहय कि मेंह एक कठोर मनखे अंव; मेंह ओला ले लेथंव, जऊन ह मोर नो हय, अऊ ओला लू लेथंव, जऊन ला मेंह नइं बोय रहंव।

[23] तब तेंह मोर पईसा ला बैंक म काबर जमा नइं कर देवय, ताकि जब मेंह वापिस आयेंव, त ओला बियाज सहित ले लेतेंव?’

[24] “तब जऊन मन उहां ठाढ़े रिहिन, ओमन ला ओह कहिस, ‘एकर ले सोन के सिक्का ला लेय लव अऊ ओला दे दव, जेकर करा दस ठन सिक्का हवय।’

[25] “ओमन कहिन, ‘हे मालिक, ओकर करा तो आघू ले दस ठन सिक्का हवय।’

[26] “ओह जबाब देवत कहिस, ‘मेंह तुमन ले कहत हंव कि हर एक झन जेकर करा हवय, ओला अऊ दिये जाही, पर जेकर करा नइं ए, ओकर ले ओ चीज घलो ले लिये जाही, जऊन ह ओकर करा बांचे हवय।

[27] पर मोर ओ बईरीमन ला इहां लानव, जऊन मन नइं चाहत रिहिन कि मेंह ओमन के राजा बनंव अऊ ओमन ला मोर आघू म मार डारव।’ ”

[28] जब यीसू ह ये कह चुकिस, त ओह यरूसलेम कोति ओमन के आघू-आघू गीस।

[29] जब यीसू ह जैतून पहाड़ करा बैतफगे अऊ बैतनियाह गांव के लकठा म आईस, त ओह अपन चेलामन ले दू झन ला ये कहिके पठोईस,

[30] “अपन आघू के गांव म जावव, अऊ जइसने ही तुमन गांव म हबरहू, तुमन ला उहां एक ठन गदही के बछेड़ा बंधाय मिलही, जेकर ऊपर कभू कोनो सवारी नइं करे हवंय। ओला ढीलके इहां ले आवव।

[31] कहूं कोनो तुम्हर ले पुछय, ‘येला काबर ढीलत हवव?’ त ओला कहव, ‘परभू ला एकर जरूरत हवय।’ ”

[32] जऊन चेलामन यीसू के दुवारा पठोय गे रिहिन, ओमन उहां जाके वइसनेच पाईन, जइसने यीसू ह ओमन ला कहे रिहिस।

[33] जब ओमन गदही के बछेड़ा ला ढीलत रिहिन, त ओकर मालिकमन ओमन ले पुछिन, “तुमन ये गदही के बछेड़ा ला काबर ढीलत हवव?”

[34] ओमन कहिन, “परभू ला एकर जरूरत हवय।”

[35] ओमन गदही के बछेड़ा ला यीसू करा लानिन। तब ओमन अपन ओनहामन ला गदही के बछेड़ा ऊपर डालिन अऊ यीसू ला ओकर ऊपर बईठा दीन।

[36] जब यीसू ह गदही के बछेड़ा म बईठके जावत रिहिस, त मनखेमन अपन ओनहा ला डहार म दसावत जावत रहंय।

[37] जब यीसू ह ओ जगह के लकठा म आईस, जिहां सड़क ह खाल्हे जैतून पहाड़ कोति जावत रिहिस, त ओकर चेलामन के जम्मो भीड़ ह आनंद मनाय लगिस अऊ ओमन जऊन चमतकार के काम देखे रिहिन, ओकर सेति चिचिया-चिचियाके परमेसर के महिमा करके कहिन:

[38] “धइन ए ओ राजा, जऊन ह परभू के नांव म आथे!” “स्वरग म सांति अऊ सबले ऊंच म परमेसर के महिमा होवय!”

[39] भीड़ म के कुछू फरीसीमन यीसू ला कहिन, “हे गुरू! अपन चेलामन ला दबकार।”

[40] “यीसू ह कहिस,” “मेंह तुमन ला कहत हंव कि यदि येमन चुप रहिहीं, त पथरामन चिचिया उठहीं।”

[41] जब यीसू ह यरूसलेम सहर के लकठा म आईस, त ओह सहर ला देखके रोईस,

[42] अऊ कहिस, “बने होतिस कि कहूं तेंह आज के दिन सिरिप ये जान गे रहितय कि का बात म तोला सांति मिलही। पर अब ओ चीजमन तोर आंखी ले छुपाय गे हवंय।

[43] ओ समय ह तोर ऊपर आही, जब तोर बईरीमन तोर चारों कोति घेरा बनाहीं अऊ तोला घेरहीं अऊ तोला जम्मो कोति ले बंद कर दीहीं।

[44] ओमन तोला अऊ तोर घेरा के भीतर रहइया मनखेमन ला पूरा नास कर दीहीं; ओमन एको ठन पथरा ला अपन जगह म नइं छोड़हीं, काबरकि तेंह ओ समय ला नइं चिनहय, जब परमेसर ह तोर करा आईस।”

[45] तब यीसू ह मंदिर म गीस अऊ ओमन ला निकाले के सुरू करिस, जऊन मन उहां सामान बेचत रिहिन,

[46] अऊ ओह ओमन ला कहिस, “परमेसर के बचन म ये लिखे हवय, ‘मोर घर ह पराथना के घर होही।’ पर तुमन येला डाकूमन के अड्डा बना दे हवव।”

[47] यीसू ह हर दिन मंदिर म उपदेस करत रिहिस। अऊ मुखिया पुरोहित, कानून के गुरू अऊ मनखेमन के अगुवामन ओला मार डारे के कोसिस करत रिहिन।

[48] पर ओमन ला अइसने करे बर कोनो उपाय नइं मिलिस, काबरकि जम्मो मनखेमन बड़े लगन से यीसू के बात ला सुनंय।

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