[1] सोन ह कइसे अपन चमक गंवा दे हवय, सुध सोन ह खोटा हो गीस! हर एक गली के कोना म पबितर रत्न बगरे परे हवंय।
[2] सियोन के कीमती लइकामन, एक समय ओमन के कीमत सोन सहीं रिहिन, पर अब माटी के बरतन सहीं समझे जावत हें, कुम्हार के हांथ के बनाय चीज सहीं!
[3] अऊ त अऊ सियार ह अपन लइकामन ला अपन दूध पीयाथे, पर मोर मनखेमन मरू-भुइयां के सुतुरमुर्ग सहीं निरदयी हो गे हवंय।
[4] पीयास के मारे दूध पीनेवाला लइका के जीभ ह ओकर तालू म चपक जाथे; लइकामन रोटी मांगथें, पर ओमन ला कोनो रोटी नइं दें।
[5] ओ मनखे जऊन मन एक समय सुवादवाला भोजन करत रिहिन ओमन अब गली म अनाथ हो गे हवंय। ओ मनखे जऊन मन राजकीय कपड़ा पहिरे पलिन-बढ़िन ओमन अब राख के कुढ़ा म परे हवंय।
[6] मोर मनखेमन के दंड ह सदोम ले कहीं बढ़के हवय, कोनो मदद के हांथ भी नइं उठिस अऊ देखते-देखत ओकर सर्वनास हो गीस।
[7] ओमन के राजकुमारमन बरफ ले जादा चमकवाले अऊ दूध ले जादा सफेद रिहिन, ओमन के देहें ह गुलाबी रत्न ले भी जादा चमकीला, अऊ ओमन के रूप ह नीलमनि सहीं रिहिस।
[8] पर अब ओमन कालिख ले घलो जादा करिया हो गे हवंय; गली म ओमन ला कोनो नइं चिनहें। ओमन के चमड़ी ह हाड़ामन म चिपक गे हवय, येह छड़ी सहीं सूख गे हवय।
[9] जऊन मन तलवार ले मारे गीन, ओमन बेहतर अंय येकर बनिस्पत कि जऊन मन अकाल ले मरथें; खेत म अन्न के कमी के कारन भूख ले मरथें अऊ बेकार होथें।
[10] करूना ले भरपूर दाईमन अपन खुद के हांथ ले अपन खुद के लइकामन ला रांधे हवंय, अऊ येह ओमन के जेवन होय हे जब मोर मनखेमन ला नास करे गीस।
[11] यहोवा ह अपन कोप ला पूरा भड़काय हवय; ओह अपन भयंकर कोरोध परगट करे हवय। ओह सियोन म एक आगी लगाय हवय जऊन ह ओकर नीव ला जलाके भसम कर दीस।
[12] धरती के राजामन बिसवास नइं करिन न ही संसार के कोनो मनखे बिसवास करिन कि बईरी अऊ बिरोधीमन यरूसलेम के दुवारमन के भीतर जा सकहीं।
[13] पर ओकर अगमजानीमन के पाप अऊ पुरोहितमन के अपराधमन के कारन अइसने होईस, जऊन मन ओकर भीतर धरमी के खून बहाईन।
[14] अब ओमन गलीमन म टटोलत हवंय मानो ओमन अंधरा हो गे हवंय। ओमन खून ले अइसने असुध हो गे हवंय कि कोनो ओमन के कपड़ा ला छुए के हिम्मत नइं करंय।
[15] मनखेमन ओमन ले चिचियाके कहिथें, “दूर हटव, तुमन असुध हव। दूरिहा रहव! दूरिहा! हमन ला झन छुवव!” जब ओमन भागथें अऊ भटकथें, त जाति-जाति के मनखेमन कहिथें, “ओमन अब इहां नइं रह सकंय।”
[16] यहोवा ह खुद ओमन ला तितिर-बितिर कर दे हवय; ओह अब ओमन के धियान नइं देवय। पुरोहितमन ला आदर नइं दिये जावय, अऊ अगुवामन ऊपर किरपा नइं करे जावय।
[17] अऊ ये घलो कि हमर आंखीमन मदद बर बेकार के रसता देखत कमजोर हो गे हवंय; हमन अपन किलामन ले एक जाति कोति देखत रहेंन जऊन ह हमर बचाव नइं कर सकिस।
[18] मनखेमन हर कदम म हमर पीछा करिन, जेकर से हमर गलीमन म हमन चल नइं सकेंन। हमर आखिरी समय लकठा म रिहिस, हमर दिनमन गनती के रिहिन, काबरकि हमर अन्त आ गे रिहिस।
[19] हमर पीछा करइयामन अकास के गिधवामन ले घलो तेज रिहिन; ओमन पहाड़ ऊपर हमर पीछा करिन अऊ निरजन जगह म हमर घात म रिहिन।
[20] यहोवा के अभिसिक्त, हमर खुद के जिनगी के सांस ह ओमन के फांदा म फंस गीस। हमन सोचेंन कि ओकर छइहां म हमन जाति-जाति के मनखेमन के बीच रहिबो।
[21] हे बेटी एदोम, तें जो ऊज देस म रहिथस, आनंद मना अऊ खुसी रह। पर ओ कटोरा ह तोर मेर घलो हबरही; तेंह मंद पीके नंगरी हो जाबे।
[22] हे बेटी सियोन, तोर सजा ह खतम हो जाही; ओह तोर बंधुवई के समय ला अऊ नइं बढ़ावय। पर हे बेटी एदोम, ओह तोर पाप के दंड दीही, अऊ तोर दुस्टता ला परगट कर दीही।