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[1] अदार नांव के बारहवां महिना के तेरहवां दिन, राजा के दुवारा दिये गे हुकूम ला पूरा करना रिहिस। ये दिन यहूदीमन के बईरीमन ओमन के ऊपर जय पाय के आसा म रिहिन, पर अब येकर उल्टा हो गीस अऊ यहूदीमन ओ बईरीमन ऊपर भारी पड़िन, जेमन ओमन ले घिन करत रिहिन।

[2] यहूदी मनखेमन राजा छयर्स के जम्मो राजमन के अपन-अपन सहर म जूरिन, ताकि ओमन ओ मनखेमन ऊपर हमला करंय, जेमन यहूदीमन ला नास करे के ठाने रिहिन। कोनो मनखे यहूदीमन के सामना नइं कर सकिन, काबरकि आने जम्मो जाति के मनखेमन म यहूदीमन के डर हमा गे रिहिस।

[3] अऊ राजमन के जम्मो परभावसाली मनखेमन, हाकिममन, राजपालमन अऊ राजा के अधिकारीमन यहूदीमन के मदद करिन, काबरकि ओमन म मोरदकै के डर हमा गे रिहिस।

[4] मोरदकै ह महल म एक बड़े मनखे हो गीस; ओकर नांव ह जम्मो राजमन म फईल गीस, अऊ ओह अऊ सक्तिसाली होवत गीस।

[5] यहूदीमन अपन जम्मो बईरीमन ऊपर तलवार चलाके मार डारिन अऊ ओमन ला नास कर दीन, अऊ ओमन अपन घिन करइयामन ऊपर अपन मन मुताबिक बरताव करिन।

[6] सूसनगढ़ के किला म, यहूदीमन पांच सौ मनखे ला मारके नास कर दीन।

[7] ओमन परसनदाता, दलपोन, असपाता,

[8] पोराता, अदलया, अरीदाता,

[9] परमसता, अरीसै, अरीदै अऊ वैजाता ला घलो मार डारिन;

[10] ये दस झन हम्मदाता के बेटा हामान के बेटा रिहिन, जऊन ह यहूदीमन के बईरी रिहिस। पर यहूदीमन ओमन के संपत्ति ला नइं लूटिन।

[11] ओ दिन सूसनगढ़ के किला म जतेक झन मारे गीन, ओमन के संखिया ला ओहीच दिन राजा ला बता दिये गीस।

[12] तब राजा ह एस्तर रानी ला कहिस, “यहूदीमन सूसनगढ़ के किला म पांच सौ मनखे अऊ हामान के दसों बेटामन ला मारके नास कर दे हवंय। राजा के बाकि राजमन म, ओमन न जाने का-का करे हवंय? अब तोर अऊ का निबेदन हे? ओला घलो पूरा करे जाही। तेंह अऊ का मांगत हस? ओ घलो तोला दिये जाही।”

[13] एस्तर ह जबाब दीस, “यदि राजा ला ये बात बने लगय, त सूसनगढ़ म यहूदीमन ला अनुमति दिये जावय कि ओमन आज के राजा के हुकूम ला कल घलो करंय, अऊ हामान के दसों बेटामन ला खंभामन म टांग दिये जावय।”

[14] राजा ह हुकूम दीस कि अइसने करे जावय। सूसनगढ़ म राजा के ये हुकूम दिये गीस, अऊ ओमन हामान के दसों बेटा ला खंभामन म टांग दीन।

[15] सूसनगढ़ म यहूदीमन अदार महिना के चौदहवां दिन जूरिन, अऊ ओमन सूसनगढ़ म तीन सौ मनखे ला मार डारिन, पर यहूदीमन ओमन के संपत्ति ला नइं लूटिन।

[16] इही बीच म, राजा के राजमन के बाकि यहूदीमन घलो जूरिन, ताकि ओमन अपनआप ला बचा सकंय अऊ अपन बईरीमन के सतावा ले छुटकारा पा सकंय। ओमन अपन बईरीमन म ले पचहत्तर हजार मनखेमन ला मार डारिन, पर ओमन ओमन के संपत्ति ला नइं लूटिन।

[17] ये काम ला अदार महिना के तेरहवां दिन म करे गीस, अऊ चौदहवां दिन, ओमन अराम करिन अऊ ओ दिन ओमन जेवनार करिन अऊ आनंद मनाईन।

[18] पर सूसनगढ़ के यहूदीमन अदार महिना के तेरहवां अऊ चौदहवां दिन जूरिन, अऊ तब पंदरहवां दिन, ओमन अराम करिन अऊ ओ दिन ओमन जेवनार करिन अऊ आनंद मनाईन।

[19] येकरे कारन देहात के यहूदी—जऊन मन गांव म रहिथें, ओमन अदार के महिना के चौदहवां दिन ला आनंद अऊ जेवनार के दिन के रूप म अऊ एक-दूसर ला उपहार देय के दिन के रूप म मनाथें।

[20] ये घटनामन ला मोरदकै ह लिखिस, अऊ ओह राजा छयर्स के जम्मो राजमन म, लकठा अऊ दूरिहा म रहइया जम्मो यहूदीमन करा चिट्ठी भेजिस,

[21] ताकि ओमन हर साल अदार महिना के चौदहवां अऊ पंदरहवां दिन उत्सव मनावंय,

[22] काबरकि येह ओ समय रिहिस, जब यहूदीमन अपन बईरीमन ले छुटकारा पाईन, अऊ ये ओ महिना रिहिस, जब ओमन के दुख ह आनंद म अऊ ओमन के सोक ह उत्सव म बदल गे रिहिस। ओह ओमन ला लिखिस कि ओमन ओ दिनमन ला जेवनार अऊ आनंद अऊ एक-दूसर करा जेवन के उपहार भेजई अऊ गरीबमन ला ईनाम देवई के दिन के रूप म मानंय।

[23] तब यहूदीमन मोरदकै के लिखे चिट्ठी के मुताबिक हर साल ओ उत्सव ला मनाय बर सहमत हो गीन, जेला कि ओमन ओ साल सुरू करे रिहिन।

[24] काबरकि हम्मदाता अगागी के बेटा हामान, जऊन ह जम्मो यहूदीमन के बईरी रिहिस, ओह यहूदीमन ला नास करे के उपाय रचे रिहिस अऊ ओमन के बरबादी अऊ बिनास बर पुर (चिट्ठी) डाले रिहिस।

[25] पर जब ये साजिस के बारे म राजा ला बताय गीस, त ओह लिखित म ये हुकूम दीस कि जऊन दुस्ट योजना हामान ह यहूदीमन के बिरोध म बनाय हवय, ओ योजना ला ओकर ही ऊपर पूरा करे जावय, अऊ ओला अऊ ओकर बेटामन ला खंभा म टांग दिये जावय।

[26] (एकरसेति ये दिनमन ला पुर सबद के कारन पुरीम कहे गीस।) ये चिट्ठी म लिखे जम्मो बात के कारन अऊ जऊन कुछू यहूदीमन देखे रिहिन अऊ जऊन कुछू ओमन ऊपर होय रिहिस, ये जम्मो के कारन,

[27] यहूदीमन अपन बर एक रिवाज बनाईन कि ओमन अऊ ओमन के संतानमन अऊ ओ जम्मो, जेमन ओमन के संग मिल गे हवंय, ये जम्मो के जम्मो हर साल ये दू दिन बिगर भूले उत्सव मनावंय अऊ ये उत्सव चिट्ठी म लिखे बात के मुताबिक ठहिराय गे समय म ही मनाय जावय।

[28] ये दिनमन ला हर पीढ़ी म हर एक परिवार के दुवारा मनाय जावय, अऊ येला हर राज अऊ हर सहर म मनाय जावय। अऊ पुरीम के ये दिनमन ला यहूदीमन के दुवारा बिगर कभू भूले मनाय जावय—अऊ न ही ओमन के संतानमन ये दिनमन ला कभू भूलंय।

[29] त फेर अबीहैल के बेटी एस्तर रानी, मोरदकै यहूदी के संग पूरा अधिकार से मजबूत करे बर पुरीम के बारे म ये दूसर चिट्ठी लिखिस।

[30] अऊ मोरदकै ह छयर्स राजा के 127 राज के जम्मो यहूदीमन ला सद्भावना अऊ भरोसा के चिट्ठी लिख भेजिस,

[31] ताकि ओमन मोरदकै यहूदी अऊ एस्तर रानी के दिये हुकूम के मुताबिक पुरीम के ये दिनमन ला अपन ठहिराय गे समय म मानंय, अऊ जइसने कि ओमन अपन अऊ अपन संतानमन बर उपास अऊ सोक के समय ठहिराय रिहिन।

[32] एस्तर के हुकूम ह पुरीम के बारे म ये नियममन ला मजबूत करिस, अऊ येला किताब म लिखके रखे गीस।

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