Skip to content
Opens in a new window
Listen to this chapter • 6:30

[1] पौलुस ह धरम महासभा कोति एकटक देखिस अऊ कहिस, “हे मोर भाईमन हो! मेंह आज तक परमेसर खातिर सही बिबेक से काम करे हवंव।”

[2] अतकी म महा पुरोहित हनन्याह ह ओमन ला, जऊन मन पौलुस के लकठा म ठाढ़े रहंय, ओकर मुहूं म मारे के हुकूम दीस।

[3] तब पौलुस ह ओला कहिस, “हे चूना पोताय भीथी! परमेसर ह तोला मारही। तेंह इहां कानून के मुताबिक मोर नियाय करे बर बईठे हवस, पर कानून के उल्टा मोला मारे के हुकूम देवत हस।”

[4] पौलुस के लकठा म ठाढ़े मनखेमन ओला कहिन, “तेंह परमेसर के महा पुरोहित के बेजत्ती करत हस।”

[5] पौलुस ह कहिस, “हे भाईमन हो! मेंह नइं जानत रहेंव कि येह महा पुरोहित ए, काबरकि परमेसर के बचन ह कहिथे, ‘अपन मनखेमन के हाकिम के बारे म खराप बात झन कह।’”

[6] तब पौलुस ह ये जानके कि इहां कुछू सदूकी अऊ फरीसीमन घलो हवंय, ओह महासभा म चिचियाके कहिस, “हे मोर भाईमन! मेंह एक फरीसी अंव अऊ एक फरीसी के बेटा अंव। मरे मनखेमन के जी उठे के मोर आसा के बारे म मोर ऊपर मुकदमा चलत हवय।”

[7] जब पौलुस ह ये बात कहिस, त फरीसी अऊ सदूकीमन म झगरा होय लगिस अऊ सभा म फूट पड़ गे।

[8] (काबरकि सदूकीमन बिसवास करथें कि मरे मनखेमन नइं जी उठंय अऊ न स्वरगदूत हवय, न आतमा; पर फरीसीमन ये जम्मो बात म बिसवास करथें।)

[9] तब अब्बड़ हो-हल्ला होईस अऊ फरीसी दल के कानून के कुछू गुरूमन ठाढ़ होके जोरदार बहस करन लगिन अऊ कहिन, “हमन ये मनखे म कोनो खराप बात नइं पावत हवन। कहूं कोनो आतमा या स्वरगदूत येला कुछू कहे हवय, त का होईस?”

[10] जब बहुंत झगरा होय लगिस, त सेनापति ह डरा गे कि कहूं ओमन पौलुस के कुटा-कुटा झन कर डारंय। एकरसेति, ओह सैनिकमन ला हुकूम दीस कि ओमन उतरके पौलुस ला मनखेमन के बीच ले निकाल लें अऊ ओला गढ़ म ले जावंय।

[11] ओ रथिया परभू ह पौलुस के लकठा म ठाढ़ होके कहिस, “हिम्मत रख। जइसने तेंह यरूसलेम म मोर गवाही दे हवस, वइसने तोला रोम म घलो मोर गवाही दे बर पड़ही।”

[12] ओकर दूसर दिन, बिहनियां, यहूदीमन एक सडयंत्र करिन अऊ ये कसम खाईन कि जब तक हमन पौलुस ला नइं मार डारबो, तब तक हमन न तो कुछू खाबो, न पीबो।

[13] चालीस ले जादा मनखे ये सडयंत्र म सामिल रिहिन।

[14] ओमन मुखिया पुरोहित अऊ अगुवामन करा गीन अऊ कहिन, “हमन कसम खाय हवन कि जब तक हमन पौलुस ला नइं मार डारन, तब तक हमन कुछू नइं खावन।

[15] अब तुमन अऊ धरम महासभा के सदस्यमन सेनापति ला समझावव कि ओह पौलुस ला तुम्हर आघू म लानय, ये ढोंग करव कि तुमन ओकर बारे म अऊ सही-सही बात जाने चाहत हव। पर ओकर इहां आय के पहिली हमन ओला मार डारे बर तियार हवन।”

[16] पर जब पौलुस के भांचा ह ये सडयंत्र के बारे सुनिस, त ओह गढ़ म जाके पौलुस ला बताईस।

[17] तब पौलुस ह एक अधिकारी ला बलाके कहिस, “ये जवान ला सेनापति करा ले जावव। येह ओला कुछू बताय चाहत हवय।”

[18] ओ अधिकारी ह पौलुस के भांचा ला सेनापति करा ले जाके कहिस, “ओ कैदी पौलुस ह मोला बलाके कहिस कि ये जवान ला तोर करा ले आवंव। येह तोला कुछू बताय चाहत हवय।”

[19] सेनापति ह जवान के हांथ ला धरके अलग ले गीस अऊ ओकर ले पुछिस, “तेंह मोला का बताय चाहत हस?”

[20] ओह कहिस: “कुछू यहूदीमन एका करे हवंय कि ओमन तोर ले बिनती करहीं कि कल पौलुस ला धरम महासभा म लाने जावय, मानो धरम महासभा ह ओकर बारे म अऊ सही-सही बात जाने चाहत हवय।

[21] पर तेंह ओमन के बात ला झन मानबे, काबरकि ओमा ले चालीस ले जादा मनखेमन पौलुस के घात म हवंय। ओमन ये कसम खाय हवंय कि जब तक ओमन पौलुस ला नइं मार डारहीं, तब तक ओमन न तो खाहीं अऊ न पीहीं। ओमन अभी तियार हवंय अऊ तोर हुकूम के बाट जोहत हवंय।”

[22] तब सेनापति ह पौलुस के भांचा ला बिदा करिस, पर ओला चेताके कहिस, “कोनो ला झन कहिबे कि तेंह मोला ये बात बताय हवस।”

[23] तब सेनापति अपन दू झन अधिकारीमन ला बलाके हुकूम दीस, “दू सौ सैनिक, सत्तर घुड़सवार अऊ दू सौ बरछीधारी मनखेमन ला आज रथिया लगभग नौ बजे कैसरिया जाय बर तियार रखव।

[24] पौलुस के सवारी बर घोड़ा रखव कि ओला राजपाल फेलिक्स करा सही-सलामत पहुंचा दिये जावय।”

[25] ओह ये चिट्ठी घलो लिखिस:

[26] महा परतापी, राजपाल फेलिक्स ला क्लौदियुस लुसियास के जोहार।

[27] ये मनखे ला यहूदीमन धरके के मार डारे चाहत रिहिन। पर जब मोला पता चलिस कि येह रोमी नागरिक ए, त मेंह सेना ले जाके येला छुड़ाके ले आएंव।

[28] मेंह ये जाने बर चाहत रहेंव कि ओमन एकर ऊपर काबर दोस लगावत रिहिन। एकरसेति येला ओमन के धरम महासभा म ले गेंव।

[29] तब मोला पता चलिस कि ओमन अपन कानून के बारे म कतको ठन सवाल ला लेके ओकर ऊपर दोस लगावत हवंय। पर मार डारे जावय या जेल म डारे जावय लईक ओमा कोनो दोस नइं ए।

[30] जब मोला ये बताय गीस कि कुछू यहूदीमन ओकर बिरोध म एक सडयंत्र रचे हवंय, त मेंह तुरते ओला तोर करा पठो देंव। मेंह ओकर ऊपर दोस लगइयामन ला घलो हुकूम दे हवंव कि ओमन तोर आघू म एकर ऊपर नालिस करंय।

[31] सैनिकमन ला जइसने हुकूम दिये गे रिहिस, ओमन वइसने करिन। ओमन पौलुस ला रातों-रात अंतिपतरिस सहर ले आईन।

[32] ओकर आने दिन, ओमन घुड़सवारमन ला पौलुस के संग जाय बर छोंड़के, खुद गढ़ म लहुंट गीन।

[33] घुड़सवारमन कैसरिया पहुंचके राजपाल फेलिक्स ला चिट्ठी दीन अऊ पौलुस ला घलो ओला सऊंप दीन।

[34] राजपाल ह चिट्ठी ला पढ़के पुछिस, “ओह कोन प्रदेस के अय?” जब ओह जानिस कि पौलुस ह किलिकिया के अय,

[35] त राजपाल ह ओला कहिस, “जब तोर ऊपर दोस लगइयामन इहां आहीं, तब मेंह तोर मामला ला सुनहूं।” तब ओह हुकूम दीस कि पौलुस ला हेरोदेस के महल म पहरा म रखे जावय।

प्रेरितमन के काम — Chapters