[1] हे घरवालीमन हो, तुमन अपन-अपन घरवाला के अधीन रहव, ताकि कहूं ओमन ले कोनो परमेसर के बचन ऊपर बिसवास नइं करय, त ओमन घरवाली के सुघर बरताव के दुवारा जीते जा सकंय,
[2] जब ओमन तुमन के सुधता अऊ बने चालचलन ला देखंय।
[3] तुमन के सुघरता बाहिरी सिंगार के दुवारा झन होवय, जइसने कि बाल गुंथई, अऊ सोन के जेवर अऊ आने-आने किसम के कपड़ा पहिरई।
[4] एकर बदले, तुमन म मनखे के भीतरी गुन, नमरता अऊ सांत सुभाव के आतमा होना चाही, जऊन ह नइं मुरझावय अऊ अइसने बातमन परमेसर के नजर म बहुंत कीमती होथें।
[5] एही किसम ले, पहिली जमाना के पबितर माईलोगनमन, जऊन मन अपन आसा परमेसर के ऊपर रखत रिहिन, अपनआप ला सुघर बनाय करत रिहिन। ओमन अपन घरवालामन के अधीन रहत रिहिन।
[6] जइसने कि सारा ह अब्राहम के बात मानय अऊ ओला अपन सुवामी कहय। कहूं तुमन सही काम करव अऊ कोनो चीज ले झन डरव, त तुमन ओकर बेटी अव।
[7] हे घरवालामन हो, ओही किसम ले अपन-अपन घरवाली के संग रहत समझदार बनव अऊ ओला निरबल संगी जानके अऊ अपन संग ओला जिनगी के अनुग्रह के बरदान के वारिस जानके ओकर आदर करव, ताकि तुम्हर पराथना म कोनो बाधा झन पड़य।
[8] आखिरी म, तुमन जम्मो एक मन होके रहव; सहानुभूति रखव; एक-दूसर ले मया करव; दयालु अऊ नम्र बनव।
[9] बुरई के बदले बुरई या बेजत्ती के बदले बेजत्ती झन करव, पर बदले म आसीस देवव काबरकि तुमन एकरे बर बलाय गे हवव, ताकि तुमन ला आसीस मिलय।
[10] जइसने कि परमेसर के बचन ह कहिथे, “जऊन कोनो, जिनगी ले मया करे चाहथे अऊ सुघर दिन देखे के ईछा करथे, ओकर बर जरूरी अय कि ओह अपन जीभ ला बुरई ले अऊ अपन ओंठ ला छल-कपट के बात ले दूरिहा रखय।
[11] ये जरूरी अय कि ओह बुरई ला छोंड़के भलई करय; अऊ ये घलो जरूरी अय कि ओह सांति के खोज करय अऊ ओकर पाछू लगे रहय।
[12] काबरकि परभू के नजर ह धरमीमन ऊपर लगे रहिथे अऊ ओकर कान ह ओमन के पराथना के तरफ लगे रहिथे, पर परभू ह बुरई करइयामन के बिरोध करथे।”
[13] यदि तुमन भलई करे बर उत्सुक हवव, त तुम्हर हानि कोन करही?
[14] पर कहूं तुमन बने काम करे के कारन दुख उठाथव, त तुमन आसीस पाहू। मनखेमन ले झन डरव अऊ न घबरावव।
[15] पर अपन हिरदय म मसीह ला परभू के रूप म आदर देवव। जऊन कोनो तुमन ला तुम्हर आसा के बिसय म कुछू पुछय, त ओला जबाब देय बर हमेसा तियार रहव।
[16] पर ये काम ला सुध बिबेक म, नमरता अऊ आदर के संग करव ताकि मसीह म तुम्हर बने चालचलन के बिरोध म, जऊन मन खराप बात कहिथें, ओमन अपन बात ले सरमिंदा होवंय।
[17] कहूं ये परमेसर के ईछा अय, त बुरई करके दुख भोगे के बदले, भलई करके दुख भोगे ह बने अय।
[18] काबरकि मसीह ह याने धरमी ह अधरमीमन खातिर या तुम्हर पाप खातिर जम्मो के सेति एकेच बार मरिस कि ओह तुमन ला परमेसर करा लानय। ओह देहें म मारे गीस, पर आतमा के दुवारा जियाय गीस,
[19] अऊ आतमिक दसा म, ओह जाके कैदी आतमामन ला परचार करिस,
[20] जऊन मन बहुंत पहिली परमेसर के हुकूम नइं मानिन, जब परमेसर ह नूह के दिन म धीर धरके इंतजार करत रहय, अऊ पानी जहाज ह बनत रहय। जहाज म सिरिप थोरकन मनखे याने जम्मो मिलाके आठ झन पानी ले बांचिन,
[21] अऊ ये पानी ह बतिसमा के चिनहां अय, जऊन ह अब तुमन ला घलो बचाथे। येह देहें के मईल धोवई नो हय, पर येह सुध बिबेक म परमेसर ले एक वायदा करई अय। यीसू मसीह के फेर जी उठे के दुवारा, ये बतिसमा ह तुमन ला बचाथे।
[22] यीसू मसीह ह स्वरग चले गीस, अऊ ओह परमेसर के जेवनी हांथ कोति हवय अऊ जम्मो स्वरगदूत, अधिकार अऊ सामर्थ ओकर अधीन म हवंय।