[1] मालिको यह जानते हुए कि स्वर्ग में तुम्हारे एक स्वामी हैं, अपने सेवकों को सही मजदूरी दो।
[2] धन्यवाद के साथ प्रार्थना में पूरे मन से लगे रहो।
[3] हमारे लिए यह बिनती करना कि मसीह के भेद और वचन के लिए परमेश्वर एक द्वार खोलें। इसी वचन की सेवा के कारण मैं कैदी हूँ।
[4] ताकि जैसा वचन मुझे देना चाहिए, मैं साफ तरीके से दे सकूँ।
[5] समय का सही इस्तेमाल करते हुए बाहर वालों के साथ, बुद्धिमानी के साथ बर्ताव करें।
[6] तुम्हारा बोलना सदैव मीठा हो, उसमें दया भरी हो ताकि तुम यह जान सको कि लोगों को कैसे जवाब दिया जाए।
[7] मेरे विषय में तुखिकुस तुम्हें समाचार देगा। मसीह में वह सज्जन भाई और मेरे साथ काम करने वाला विश्वासयोग्य सेवक है।
[8] मैंने इसी उद्देश्य से उसे तुम्हारे पास भेजा है, कि तुम हमारा हाल चाल जान सको, और वह तुम्हारी हिम्मत बढ़ा सके।
[9] उनेसिमुस विश्वसनीय और भला व्यक्ति है, उसे भी साथ में भेजा गया है और वह तुम्हीं में से है। ये लोग ही यहाँ पर होने वाली सभी बातों को बतलाएँगे।
[10] अरर्स्तिखुस, मेरा संगी कैदी और मरकुस (जिसके बारे में तुम्हें बताया गया) जो बरनबास का भाई है, नमस्कार कहते हैं। मैंने बताया था कि यदि मरकुस तुम्हारे पास आता है, उसका स्वागत करो।
[11] यीशु, जो यूस्तुस भी कहलाता है, तुम्हें सलाम कहता है। ये तीनों यहूदी मत से आए हैं, जिन्होंने स्वर्गिक पिता के राज्य के लिए ईमानदारी से मेहनत की है - वे ऐसे लोग हैं, जिनसे मुझे तसल्ली मिलती है।
[12] इपफ़्रास भी जो तुम में से एक और मसीह का सेवक है, सलाम कहता है। वह सदा बड़ी लगन से प्रार्थना में मेहनत करता है, ताकि तुम परमेश्वर की इच्छा में पूरी तरह स्थिर बने रहो।
[13] मैं इस बात का गवाह हूँ कि लौदीकिया और हियरापोलिस के लोगों लिए उसके पास बड़ी धुन है।
[14] प्रिय चिकित्सक लूका और देमास तुम्हें नमस्कार कहते हैं। उन भाइयों को नमस्कार कहना
[15] जो लौदीकिया में हैं और निम्फ़स के घर में मिलने वाली मण्डली को भी।
[16] जब यह चिट्ठी तुम्हारे यहाँ पढ़ी जाए, तो यह भी ध्यान रखना कि लौदीकिया के चर्च में भी यह पढ़ी जाए और इसी तरह तुम लोग लौदीकिया को लिखे गए पत्र को पढ़ना।
[17] अर्खिप्पुस से कहना, कि वह यीशु से मिली हुयी सेवा को पूरा करे।
[18] यह अभिवादन मैं पौलुस स्वयं अपने हाथों से लिख रहा हूँ। मेरी जंजीरों को याद रखो। तुम पर दया बनी रहे। ऐसा ही हो।