[1] जैसे उनके बीच में झूठे भविष्यद्वक्ता थे, वैसे ही तुम्हारे बीच में भी झूठे शिक्षक होंगे, जो बड़ी चालाकी से पाखंड की बातें पेश करने के साथ-साथ उस परमेश्वर का इन्कार करेंगे जिन्होंने विश्वासियों को मोल लिया है। इस कारणवश वे अपने ऊपर बहुत जल्दी बर्बादी को लाएँगे।
[2] बहुत से लोग उन की नुकसान पहुँचाने वाले चालचलन को अपना लेंगे और उनकी वजह से सच्चाई के रास्ते की बदनामी की जाएगी।
[3] अपने फ़ायदे के लिए वे अपनी बनाई हुयी शिक्षा से तुम्हें अपने व्यापार का साधन बनाएँगे। उनकी सज़ा बहुत पहले ठहरा दी गयी थी और यह उन्हें बहुत जल्दी मिल भी जाएगी।
[4] क्योंकि अगर परमेश्वर पिता ने अपने खिलाफ़ बलवा करने वाले स्वर्गदूतों को नहीं छोड़ा, बल्कि नरक में डालकर अन्धेरे की जंजीरों से बान्ध दिया, ताकि वे आखिरी फ़ैसले तक वहीं रहें।
[5] और धार्मिकता के संदेशवाहक नूह और सात लोगों को छोड़कर, बलवा करने वाली पीढ़ी को जल-प्रलय से नाश करके उस पुरानी दुनिया को भी नहीं छोड़ा।
[6] अगर उन्हों ने सदोम-अमोरा का नामों-निशां मिटा कर राख बना दिया ताकि भविष्य में बुरा करने वालों के लिये एक नमूना छोड़ दें।
[7] तथा धर्मी लूत को छुड़ा लिया, जो गंदा जीवन जीने वालों की वजह से बहुत परेशान था।
[8] वह उनके बीच में रहते हुए जो कुछ देखता और सुनता था, उसकी वजह से बहुत पीड़ित था।
[9] तो यीशु जानते हैं कि मुक्ति पाए हुए व्यक्ति को परख के समय से कैसे छुड़ाया जाए और दुष्ट व्यक्ति को न्याय के दिन तक सज़ा दिए जाने के समय तक कैसे रखा जाए।
[10] खासकर जो अशुद्ध करने वाली चाह में लिपटे रहते हैं और अधिकार को तुच्छ जानते हैं। वे घमण्डी और ज़िद्दी हैं और इज़्ज़तदार स्वर्गदूतों के खिलाफ़ में बातें करने से पीछे नहीं हटते।
[11] हालांकि स्वर्गदूत अधिकार और शक्ति में अधिक बलवान होते हैं, फिर भी उन लोगों के खिलाफ़ में परमेश्वर के सामने गन्दे इल्ज़ाम नहीं लगाते।
[12] लेकिन ये लोग नासमझ जानवर की तरह हैं जो पकड़े जाने और नाश किए जाने के लिए पैदा हुए हैं, जिन बातों की समझ उन्हें नहीं है, ये लोग उसी की बुराई करते हैं, और वे अपने बर्बादी में ही मिट जाएँगे।
[13] इन्हें बुराई का बदला ज़रूर मिलेगा। वे दिन की रोशनी में मज़ा लेना चाहते है वे दाग और धब्बा हैं। वे तुम्हारे साथ खाना तो खाते हैं, लेकिन उन्हें अपने धोखे में ही पड़ा रहना अच्छा लगता है।
[14] उनकी आँखें व्यभिचार से भरी हुयी हैं और वे गुनाह करने से रूक नहीं सकते। वे चंचल मन वाले लोगों को फँसा लेते हैं। उनका मन लालच का आदी हो गया है। वे शापित लोग हैं। वे सही रास्ते को छोड़कर गुमराह हो गए हैं।
[15] बओेर के बेटे बिलाम, जिसने बेईमानी के लाभ से प्यार किया था, उन्हों ने उसी के रास्ते को अपना लिया है।
[16] बालाम से गधी ने इन्सान की जुबान में बोलकर उस के बलवापन के लिए उसे डाँटकर उसके पागलपन को रोकना चाहा था।
[17] ये लोग ऐसे कुओं के समान हैं, जो सूखे होते हैं। ऐसे बादल जिन्हें हवा उड़ा ले जाती है। उनके लिए अँधियारे का कालापन हमेशा के लिए आरक्षित है।
[18] जब वे बढ़ा-चढ़ा कर बेकार की बातें करते हैं, वे बड़ी बेशर्मी के साथ शरीर की इच्छा से उन लोगों को फँसा लेते हैं, जो इन बुराई में रहने वालों से बच निकले हैं।
[19] वे दूसरों को आज़ादी का वायदा करते हैं, लेकिन खुद गुनाह के गुलाम हैं। जिस बात से एक आदमी हार जाता है, वही उसको गुलामी में लाती है।
[20] इसलिए कि अगर वे मुक्तिदाता यीशु मसीह को जानने के बाद इस दुनिया की सड़ाहट से बच गए हैं, और वे फिर से उसमें फँसते हुए घिर जाते हैं, तो उनका अन्त उनकी शुरूआत से बदतर है।
[21] उनके लिए यह भला होता कि उन्हों ने धार्मिकता के रास्ते को जाना ही नहीं होता, बजाए इसके कि पवित्र आज्ञा को जानने के बाद उससे मुड़ जाएँ।
[22] लेकिन वे एक सच्ची कहावत के जैसे हैं: "कुत्ता अपनी उल्टी को फिर चाटता है और धुला-धुलाया सूअर फिर से कीचड़ में जाता है।"