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[1] जब शीबा देश की रानी ने शलोमोन की कीर्ति के विषय में सुना, वह मुश्किल प्रश्नों के साथ येरूशलेम आई कि शलोमोन को परखे. वह अपने साथ सेवकों का विशाल दल लेकर आई थी. उसके साथ के ऊंटों पर मसाले, बहुत मात्रा में सोना और रत्न थे. जब उसकी भेंट शलोमोन से हुई, उसने शलोमोन के सामने अपने हृदय के सारे विचार प्रकट कर दिए.

[2] शलोमोन ने उनके सभी सवालों के जवाब दिए; ऐसा कोई भी विषय न था, जो शलोमोन के लिए रहस्य साबित हुआ हो, जिसकी व्याख्या वह न कर सके.

[3] जब शीबा की रानी ने शलोमोन की प्रजा, उनके द्वारा बनाया भवन,

[4] उनकी मेज़ का भोजन, अधिकारियों की बैठने की व्यवस्था, उनके सेवकों द्वारा की जा रही सेवा, उनकी कपड़े, उनके दाखमधु परोसने वाले और उनकी वेशभूषा, और वह सीढ़ीनुमा रास्ता, जिसे वह याहवेह के भवन को जाया करते थे; देखा, वह हैरान रह गई.

[5] उसने राजा से कहा, “आपके विषय में और आपकी बुद्धि के बारे में अपने देश में मैंने जो कुछ सुन रखा था, वह सच है.

[6] मैंने उस सुनी हुई सूचना का विश्वास ही नहीं किया था, जब तक मैंने यहां आकर यह सब खुद अपनी आंखों से न देख लिया. सच तो यह है कि जो ख़बर मुझे वहां दी गई थी, वह आपकी बुद्धिमानी के सामने आधी भी नहीं थी. आप उस ख़बर से कहीं ज्यादा हैं.

[7] कैसे सुखी हैं आपके ये सेवक, जो सदा आपके सामने रहते हैं और आपकी बुद्धिमानी की बातें सुनते रहते हैं!

[8] धन्य हैं याहवेह, आपके परमेश्वर जिनकी आप में खुशी है और जिन्होंने आपको अपने सिंहासन पर याहवेह आपके परमेश्वर के राजा के रूप में बैठाया है. यह इसलिये कि इस्राएल पर आपके परमेश्वर का प्रेम बना है और उनकी इच्छा यह है कि उन्हें हमेशा के लिए स्थिर करें. इसी इच्छा से उन्होंने आपको उनका राजा बनाया है कि आप न्याय और धर्म से शासन कर सकें.”

[9] शीबा की रानी ने राजा को लगभग चार हज़ार किलो सोना, बहुत मात्रा में मसाले और कीमती रत्न भेंट में दिए. जो मसाले शीबा की रानी ने राजा शलोमोन को भेंट में दिए थे, वैसे मसाले इसके पहले कभी देखे नहीं गए थे.

[10] (इसके अलावा हूरम के सेवक और शलोमोन के सेवक, जो ओफीर से लाए थे, अपने साथ इसके अलावा चन्दन की लकड़ी और कीमती रत्न भी लाए थे.

[11] चन्दन की लकड़ी से राजा ने याहवेह के भवन और राजभवन के चबूतरे बनवाए और इन्हीं से राजा ने गायकों के गाने के लिए वीणाएं और सारंगी नामक वाद्य-यंत्रों को भी बनवाया. यहूदिया राज्य में इसके पहले ऐसा कभी देखा न गया था.)

[12] इसी समय राजा शलोमोन ने शीबा की रानी द्वारा बताई गई उसकी हर एक इच्छा पूरी की, वह सब, जिसकी उसने विनती की. यह सब उस भेंट से बढ़कर था, जो उसने राजा शलोमोन को दी थी. तब वह अपने सेवकों के साथ अपने देश को लौट गई.

[13] शलोमोन को हर साल लगभग बाईस हज़ार किलो सोना मिलता था.

[14] वह सब उस सोने और चांदी से अलग था, जो शलोमोन को व्यवसायियों और व्यापारियों, अरेबिया के राजाओं और देश के राज्यपालों द्वारा दिया जाता था.

[15] राजा शलोमोन ने पीटे हुए सोने की 200 विशाल ढालों को बनवाया. हर एक ढाल में लगभग सात किलो सोना लगाया गया था.

[16] शलोमोन ने पीटे हुए सोने से 300 ढालों को भी बनवाया. हर एक ढाल में लगभग साढ़े तीन किलो सोना लगाया गया था. इन सभी को राजा ने लबानोन के जंगल के भवन में रखाव दिया.

[17] इसके अलावा राजा ने हाथी-दांत का एक विशाल सिंहासन बनाकर उसे शुद्ध सोने की चद्दर से मढ़ दिया.

[18] इस सिंहासन की छः सीढ़ियां थी और सोने की बनी पैर रखने की चौकी, जो सिंहासन ही से जुड़ी थी. सिंहासन के दोनों ओर दो हत्थे थे और उन्हीं से लगे हुई थी दो सिंहों की आकृति.

[19] इन छः सीढ़ियों पर दोनों ओर खड़े हुए बारहसिगों की आकृति थी. किसी भी दूसरे राज्य में इसके पहले ऐसा कुछ कभी बनाया नहीं गया था.

[20] राजा शलोमोन के पीने के सारे बर्तन सोने के थे. लबानोन वन भवन में इस्तेमाल किए जानेवाले बर्तन शुद्ध सोने के थे. चांदी कहीं भी इस्तेमाल नहीं हुई थी क्योंकि शलोमोन के शासनकाल में चांदी की कोई कीमत ही न थी.

[21] इसके पीछे कारण यह था कि राजा के जहाज़ थे, जिन पर हूरम के सेवक तरशीश जाया करते थे. हर तीसरे साल जहाज़ तरशीश से सोना, चांदी, हाथी-दांत, बन्दर और मोर लेकर लौटते थे.

[22] इस प्रकार राजा शलोमोन पृथ्वी के सभी राजाओं में धन-सम्पदा-ऐश्वर्या और बुद्धि में सबसे आगे थे.

[23] पृथ्वी के सभी राजा परमेश्वर द्वारा शलोमोन के मन में दिए गए बुद्धि के वचनों को सुनने के लिए उनके सामने आने के इच्छुक रहते थे.

[24] हर एक साल उनमें से हर एक अपने साथ भेंट में सोने और चांदी की वस्तुएं, वस्त्र, हथियार, मसाले, घोड़े और खच्चर लाया करता था.

[25] घोड़ों और रथों के लिए शलोमोन की चार हज़ार घुड़शालाएं थी. उनके बारह हज़ार घुड़सवार थे, जिन्हें उन्होंने रथों के लिए बनाए गए नगरों में रखा हुआ था. इनमें से कुछ को उन्होंने अपने पास येरूशलेम में रखा था.

[26] शलोमोन का अधिकार फरात नदी से लेकर फिलिस्तीनियों के देश और मिस्र देश की सीमा तक के सभी राजाओं के ऊपर था.

[27] राजा द्वारा येरूशलेम में चांदी का मूल्य वैसा ही कर दिया गया था, जैसा पत्थरों का होता है और केदार की लकड़ी का ऐसा जैसे तराई के गूलर के पेड़ों का.

[28] शलोमोन के लिए घोड़े मिस्र देश के अलावा दूसरे देशों से भी लाए जाते थे.

[29] शलोमोन द्वारा बाकी कामों का ब्यौरा पहले से आखिरी तक, नबी नाथान की किताब में, शीलोनवासी अहिजाह की भविष्यवाणी में और दर्शी इद्दो के दर्शनों में, जो नेबाथ के पुत्र यरोबोअम के संबंध में हैं, दिया गया है.

[30] सारे इस्राएल पर शलोमोन ने येरूशलेम में चालीस साल राज किया.

[31] शलोमोन हमेशा के लिए अपने पूर्वजों में जा मिले. उनकी अंतिम संस्कार उनके पिता दावीद के नगर में किया गया. उनका पुत्र रिहोबोयाम उनके जगह पर राज करने लगा.

2 इतिहास — Chapters