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[1] फेर इसकै बाद मन्नै सुर्ग म्ह एक और बड्ड़ा अर अदभुत निशान देख्या, यानिके सात सुर्गदूत जिनकै धोरै सात आखरी बिप्दा थी, क्यूँके उनके खतम हो जाण पै परमेसवर के प्रकोप का अंत सै।

[2] फेर मन्नै इसा लाग्या जणु मान्नो मै एक काँच के समुन्दर नै देखण लागरया सूं, जिस म्ह आग मिली होई थी, मन्नै इस समुन्दर के किनारे पै उन माणस ताहीं खड़े देख्या, जिननै उस बड़े पशु ताहीं हराया था, क्यूँके उननै उसकी मूर्ति की आराधना करण तै अर उसकै नाम की मोहर लगाण तै भी मना कर दिया था, उन माणसां के हाथ म्ह परमेसवर के जरिये दी गई वीणा थी।

[3] वे परमेसवर के दास मूसा नबी का गीत, अर मेम्‍ने का गीत गा-गाकै कहवै थे, “हे सर्वशक्तिमान प्रभु परमेसवर, तेरे काम महान्, अर अनोक्खे सै, हे युग-युग के राजा, तेरी चाल सही अर सच्ची सै।”

[4] “हे प्रभु, कौण तेरे तै न्ही डरैगा अर तेरे नाम की महिमा न्ही करैगा? क्यूँके सिर्फ तू ए पवित्र सै। सारी जात आकै तेरे स्याम्ही मोध्धे पड़कै प्रणाम करैगी, क्यूँके तेरे न्याय के काम दिखगे सै।”

[5] जिब माणसां नै गाणा बन्द कर दिया, तो मन्नै सुर्ग म्ह मन्दर ताहीं खुल्या होया देख्या, जो के परमेसवर के तम्बू की तरियां था।

[6] अर वे सात्तु सुर्गदूत जिनकै धोरै सात्तु बिप्दा थी, शुद्ध अर चमकदी होई मलमल के लत्ते पहरे होड़, छात्ती पै सुनहरे परणे बाँधे होड़ मन्दर तै लिकड़े।

[7] अर उन च्यारु प्राणियाँ म्ह तै एक नै उन सात सुर्गदूत्तां ताहीं परमेसवर के, जो युगानुयुग जीवै सै, प्रकोप तै भरे होड़ सात सोन्ने के कटोरे दिए।

[8] अर परमेसवर की महिमा अर उसकी सामर्थ कै कारण मन्दर धुम्मै तै भर गया, अर जिब तक उन सात्तु सुर्गदूत्तां की सात्तु बिप्दा खतम न्ही होई तब तक कोए मन्दर म्ह न्ही जा सक्या।

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