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Ma | Padma Sachdeva
04 August 2026

Ma | Padma Sachdeva

Pratidin Ek Kavita

About

माँ । पद्मा सचदेव


बुलाने के लिए कई नाम हैं


जिसे पुकारो बोलता भी है

पर एक नाम ऐसा है जिसे पुकारो तो


सब चौकन्ने हो जाते हैं

सभी सोचते हैं ये नाम मेरे लिए तो नहीं


माँ... माँ... माँ...

ओ लड़के


ओ बेटा

वह मेरी बेटी


कहाँ मर गई हो

माँ माँ माँ कहता जब कोई बच्चा


गली में से निकलता है

सड़क पार करता है


या पहाड़ चढ़ता है

पहाड़ उतरकर आँगन में आ खड़ा होता है


तब माँ एकदम सुबह के गुलाब की तरह

खिल उठती है


दोनों दरवाज़े थाम कर देखती है

गलियों में जाते, गुल्ली-डंडा घुमाते, गिट्टे उछालते


माँ माँ कहकर लिपट जाते हैं

माँ को सब एक तरह से ही बुलाते हैं


मधुरता में नहला कर, चाव से भर कर

ज़रा-सा डर कर आतुरता से


माँ... माँ... माँ

बछड़ा रंभाता है बां बां बां


गाय कई बार रस्सी तोड़ने का यत्न करती है

मालिक का कोई डर नहीं रहता


कोई भी उलझन हो, कोई भी ख़ुशी हो, कोई भी उम्र हो

कहता है माँ, माँ कहाँ हो तुम माँ


हाय बाप कोई नहीं कहता