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Abki Baar Lauta To | Kunwar Narayan
25 October 2026

Abki Baar Lauta To | Kunwar Narayan

Pratidin Ek Kavita

About

अबकी बार लौटा तो । कुँवर नारायण


अबकी बार लौटा तो

बृहत्तर लौटूँगा


चेहरे पर लगाए नोकदार मूँछें नहीं

कमर में बाँधे लोहे की पूँछे नहीं


जगह दूँगा साथ चल रहे लोगों को

तरेर कर न देखूँगा उन्हें


भूखी शेर-आँखों से

अबकी अगर लौटा तो


मनुष्यतर लौटूँगा

घर से निकलते


सड़कों पर चलते

बसों पर चढ़ते


ट्रेनें पकड़ते

जगह बेजगह कुचला पड़ा


पिद्दी-सा जानवर नहीं

अगर बचा रहा तो


कृतज्ञतर लौटूँगा

अबकी बार लौटा तो


हताहत नहीं

सबके हिताहित को सोचता


पूर्णतर लौटूँगा