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Aaj Shaam Hai Bahut Udaas | Bhagwati Charan Verma
05 October 2026

Aaj Shaam Hai Bahut Udaas | Bhagwati Charan Verma

Pratidin Ek Kavita

About

आज शाम है बहुत उदास । भगवतीचरण वर्मा


आज शाम है बहुत उदास

केवल मैं हूँ अपने पास ।


दूर कहीं पर हास-विलास

दूर कहीं उत्सव-उल्लास

दूर छिटक कर कहीं खो गया

मेरा चिर-संचित विश्वास ।


कुछ भूला सा और भ्रमा सा

केवल मैं हूँ अपने पास

एक धुन्ध में कुछ सहमी सी

आज शाम है बहुत उदास ।


एकाकीपन का एकान्त

कितना निष्प्रभ, कितना क्लान्त ।


थकी-थकी सी मेरी साँसें

पवन घुटन से भरा अशान्त,

ऐसा लगता अवरोधों से

यह अस्तित्व स्वयं आक्रान्त।


अंधकार में खोया-खोया

एकाकीपन का एकान्त

मेरे आगे जो कुछ भी वह

कितना निष्प्रभ, कितना क्लान्त।


उतर रहा तम का अम्बार

मेरे मन में व्यथा अपार।


आदि-अन्त की सीमाओं में

काल अवधि का यह विस्तार

क्या कारण? क्या कार्य यहाँ पर ?

एक प्रश्न मैं हूँ साकार।


क्यों बनना? क्यों बनकर मिटना?

मेरे मन में व्यथा अपार

औ समेटता निज में सब कुछ

उतर रहा तम का अम्बार।


सौ-सौ संशय, सौ-सौ त्रास,

आज शाम है बहुत उदास।


जोकि आज था तोड़ रहा वह

बुझी-बुझी सी अन्तिम साँस

और अनिश्चित कल में ही है

मेरी आस्था, मेरी आस।


जीवन रेंग रहा है लेकर

सौ-सौ संशय, सौ-सौ त्रास,

और डूबती हुई अमा में

आज शाम है बहुत उदास।