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आइए जानते हैं कि जया किशोरी जी ने किस प्रकार जीवन आध्यात्म और रिश्तों को परिभाषित किया हैं जया किशोरी ने कहा है कि जीवन को सफ़ल जीवन बनाने में आध्यात्म अंधेरे में रोशनी मिलने जैसा होता हैं। माता - पिता की परवरिश भी मायने रखती हैं कि बच्चे किस दिशा में जा रहे है रिश्तों की भी बहुत बड़ी मेहनत लगती हैं आध्यात्म जीवन पाने में कामयाब होने के लिए। जया किशोरी जी।